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Topical Map Blog kya hai
Blogging Tips

Topical Map SEO kya hai: में रैंकिंग पर क्या असर! जानिए

by Techaasvik February 10, 2024
written by Techaasvik

क्या आप जानते हैं, कि Topical Map क्या है? Topical Map SEO Kya Hai? इसका क्या काम होता है? अगर नहीं, तो आईये बताता हूँ। सभी Beginner जो Blogging में नए है, उन सब की मुश्किलों के सीक्रेट Solution का नाम Topical Map है। 

ऐसा इसीलिए कह रहा हूँ, क्यूंकि हर किसी के लिए ब्लॉग्गिंग आसान नहीं होती है। ब्लॉग्गिंग के शुरूआती दौर में एक Beginner को बहुत सारी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। जैसे- ब्लॉग्गिंग क्या है?, ब्लॉग कैसे बनाये?, गूगल सर्च कंसोल क्या है?, हर रोज नए ट्रेंडिंग कंटेंट कैसे ढूंढे?, कंटेंट कहाँ से ढूंढे?, गूगल में रैंक कैसे करें? आदि।

आप चिंता मत करिए, आज इस लेख में हम इन सभी मुश्किलों के समाधान की बात करेंगे। हम इस लेख में बात करेंगे, कि Topical Map SEO क्या है? Topical Map Blog Kya Hai? इसकी जरूरत क्यों है? और आप कैसे अपने ब्लॉग के लिए Topical Map बना सकते हैं। सोचिये अगर आपको पहले ही पता हो, कि आपको किस Topic पर लिखना है। इससे आपका काम कितना आसान हो जायेगा, तो चलिए शुरू करते हैं-

Topical Map Blog kya hai

टॉपिकल मैप क्या है (what is Topical Map)

टॉपिकल मैप एक ऐसा तरीका होता है, जिसकी मदद से एक मुख्य टॉपिक को कईं भागों में बाँटकर सबकी जानकारी को एक दुसरे से जोड़कर दिखाया जा सकता है। इसे Topical Map कहते हैं। 

Topical Map SEO kya hai (what is Topical Map SEO)

टॉपिकल मैप SEO में एक मुख्य टॉपिक होता है। इस मुख्य टॉपिक से रिलेटेड कईं सारे सब-टॉपिक होते हैं। हम इन सभी सब-टॉपिक पर अलग-अलग लेख लिखते हैं। सभी को एक दुसरे के साथ इंटरनल लिंकिंग से जोड़ा जाता है। इसका फायदा यह होता है, कि इसकी मदद से यूजर को टॉपिक की गहराई तक जानकारी मिलती है। इससे यूजर Search Intent को भी अच्छा किया जा सकता है।

Topical Map SEO: आखिर इसकी जरूरत क्यों है?

जब आप एक मुख्य टॉपिक को कुछ सब-टॉपिक में बांटकर अपनी ऑडियंस तक पहुंचाते हैं, तो इससे टॉपिक को अधिक गहराई तक कवर किया जा सकता है। इससे यूजर को स्टीक और अधिक जानकारी प्राप्त होती है।

इसका एक फायदा यह भी होता है, कि ब्लॉग पर गूगल और यूजर का विश्वास (Trust) बढ़ता है।

SEO पर अच्छा प्रभाव: Topical Map SEO

1. बेहतर कंटेंट: अपने कंटेंट को ज्यादा गहराई तक यूजर को परोसना आपके कंटेंट को ज्यादा बेहतर बनाता है।

2. यूजर एक्सपीरियंस पर अच्छा प्रभाव: कंटेंट को अधिक गहराई तक कवर करने से यूजर इंगेजमेंट बढ़ता है। 

3. जबर्दस्त ब्रांडिंग: जब आप टॉपिकल मैप का इस्तेमाल करते हैं तो आपके टॉपिक का एक अच्छा स्ट्रक्चर बन जाता है। इसे गहराई में कवर करने के कारण दुसरे ब्लॉगर भी इसे लिंक करने को देखते हैं। इससे आपको एक Do-follow Backlink भी मिल सकता है।

अपना Topical Map कैसे बनाएं- (How To Create Topic Maps Hindi)

अपने ब्लॉग के लिए टॉपिकल मैप बनाने के लिए आप Ai का इस्तेमाल कर सकते हैं। लेकिन फिर भी आपको कुछ महत्वपूर्ण बिन्दुओं को ध्यान में रखना हैं। इससे आप Topical map SEO को ज्यादा बेहतर कर पाएंगे कुछ मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं – 

1: अच्छे मुख्य टॉपिक (Pillar Topic) चुनना:

अपनी पसंद और अनुभव के क्षेत्र से ही विषय का चुनाव करें। इससे आप अपने अनुभव को विषय की गहराईयों में उतारकर सटीक जानकारी अपनी ऑडियंस तक पहुंचा सकते हैं। 

2. कीवर्ड रिसर्च करें:

अपने टॉपिक में रिलेटेड कीवर्ड का इस्तेमाल करें। Google trends और गूगल सर्च से अपने टॉपिक से रिलेटेड सर्च, कीवर्ड और सब-टॉपिक को ढूंढे इसका फायदा यह होगा, कि सर्च इंजन आपके कंटेंट के कांटेक्स्ट को अच्छे से समझ पाएंगे। 

3. टॉपिक को सब-टॉपिक में बांटे:

अपने मुख्य टॉपिक को कईं हिस्सों में बाँट लें। अब सभी सब-टॉपिक के लिए कीवर्ड रिसर्च करें इन सभी सब-टॉपिक पर अलग-अलग ब्लॉग पोस्ट लिखकर पोस्ट करें। लेकिन ध्यान रखें इन सभी सब-टॉपिक को गहराई तक कवर करें, जिससे यूजर को ज्यादा से ज्यादा जानकारी मिले।

अपने सब-टॉपिक के word काउंट बढ़ाने में ध्यान ना देकर यूजर को अधिक और सटीक जानकरी देने पर ध्यान दें।

4. सर्च इंटेंट:

अपने विषय और उप विषयों को लिखने से पहले यूजर सर्च इंटेंट क्या है, इसे समझना आपके लिए जरूरी है। सर्च इंटेंट को ध्यान में रखकर अपने कीवर्ड को चुने।   

5. लॉन्ग टेल कीवर्ड

अपने विषय और उप विषयों के लिए सर्च इंटेंट को ध्यान में रखकर Long tail Keyword का इस्तेमाल करें।

6. विसुअल Presentation:

आप अपने टॉपिकल मैप के डायग्राम को अपने ब्लॉग पर बनाकर यूजर के सामने पेश कर सकते हैं। इससे उन्हें समझने में आसानी होगी। इसके लिए आप टेबल या लिस्ट का इस्तेमाल भी कर सकते हैं।

7. कंटेंट को बेहतर बनाना:

अपने कंटेंट को समय-समय पर अपडेट करना जरूरी होता है। इससे सर्च इंजन के बोट्स को एक सन्देश जाता है, कि आपका कंटेंट समय के साथ नई जानकारी को अपडेट करके दिखाता है। इसका फायदा आपको सर्च इंजन रैंकिंग में भी हो सकता है।

8. इंटरनल लिंकिंग: 

अपने सभी सब-टॉपिक को नेचुरल रूप से एक दुसरे के साथ इंटरनल लिंक जरुर करें। इससे सर्च इंजन में आपके ब्लॉग पोस्ट की अथॉरिटी बिल्ड होती है। एक विश्वास यूजर में आपके ब्लॉग के प्रति बनता है। इसके अलावा यूजर को टॉपिक समझने में आसानी होती है।

9: स्ट्रक्चर और फॉरमेट

अपने ब्लॉग पोस्ट के स्ट्रक्चर और फॉरमेट पर ध्यान दें। इसमें headings और sub-headings का इस्तेमाल करें। पैराग्राफ को ज्यादा बड़ा या ज्यादा छोटा न बनाएं। आप एक पैराग्राफ में 3 से 4 लाइन तक रख सकते हैं। इससे यूजर को जानकारी पढने और समझने में आसानी होगी। इस लेख के बारे में आप Similar web से भी जानकारी ले सकते हैं

कुछ टिप्स:

  • ऑनलाइन टूल या Ai का इस्तेमाल: कुछ टूल्स और Ai का इस्तेमाल करके एक Topical Map की रणनीति बनाएं।
  • Keyword Research tool का इस्तेमाल: सर्च वॉल्यूम, CPC, कम्पटीशन आदि चेक करने के लिए कीवर्ड रिसर्च टूल्स का इस्तेमाल करें इसके लिए Google trends, Google keyword planner और Semrush जैसे टूल्स का इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • Topical Map tool का इस्तेमाल: आप Topical मैप बनाने के लिए SEO Topical Map Generator tool का इस्तेमाल भी कर सकते हैं।  
  • Internal linking का इस्तेमाल: सभी सब-टॉपिक को एक दुसरे के साथ नेचुरल रूप से लिंक करें। आप किसी पैराग्राफ में दुसरे सब-टॉपिक से मिलता-जुलता कीवर्ड इस्तेमाल करें। अब उस कीवर्ड पर दुसरे सब-टॉपिक का लिंक लगा सकते हैं। इससे यूजर इस लिंक से दुसरे सब-टॉपिक तक आसानी से पहुंच सकता है।

निष्कर्ष – Topical map SEO kya hai

इस लेख में हमने आपको बताया है, कि Topical map SEO kya hai, Topical Map कैसे बनाते हैं, और इसके क्या फायदे हो सकते हैं। I आशा करते हैं, कि आपको आज का लेख Topical Map SEO Kya Hai पसंद आया होगा। धन्यवाद राधे राधे।

February 10, 2024 0 comments
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google discover kya hai
Blogging Tips

Google Discover क्या है, Blog को गूगल डिस्कवर में लायें 2024 

by Techaasvik February 4, 2024
written by Techaasvik

Blog को गूगल डिस्कवर में कैसे लायें– अगर आप नए ब्लॉगर हैं और आप अपने ब्लॉग के Google Search Console डैशबोर्ड में डिस्कवर का ऑप्शन ऑन करना चाहते है जिससे आपकी वेबसाइट पर ट्रैफिक आना शुरू हो जाए | अगर आपका डिस्कवर किसी वजह से अभी तक ऑन नहीं हुआ है तो आज हम कुछ जरूरी पॉइंट्स को समझने की कोशिश करेंगे।

google discover history

आज हम आपको इस आर्टिकल में Google Discover History क्या है, Google Discover से क्या फायदे हो सकते हैं और आपको कौन कौन सी Google Discover Settings करनी है। आज हम इन सभी पॉइंट्स को समझने की कोशिश करेंगे। आर्टिकल को अंत तक पढ़ते हैं तो आप भी अपने ब्लॉग को Google Discover या Google App में ला सकते हैं। Techaasvik Blog पर आपका स्वागत है चलिए आर्टिकल को शुरू करते हैं-

Google Discover History क्या है

Google Feed को 2016 में लॉन्च किया गया था, जिसको 2018 में Google Discover का नाम दिया गया । इसमें यूजर्स अपने मन मुताबिक न्यूज, आर्टिकल, यूट्यूब वीडियो को देख सकते हैं। 

Google Discover क्या है – Google Discover in Hindi

गूगल डिस्कवर Google App का एक हिस्सा है। Google App में यूट्यूब वीडियो, स्टोरीज, आर्टिकल्स दिखाई देते हैं। इन सभी कॉन्टेंट को डिस्कवर कहते हैं। यूजर्स अपने पसन्द के अनुसार Google Discover को कस्टमाइज कर सकते हैं। Google Discover अपने यूजर्स के इंट्रेस्ट के अनुसार उनको कॉन्टेंट दिखाता है। जिससे यूजर्स अपने पसन्द के Trending और Searchable कंटेंट को आसानी से Google App में पढ़ सकते हैं।

Google Discover से क्या फायदे हो सकते हैं

Google Discover की मदद से अपने ब्लॉग को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने का अवसर मिलता है। जिससे आपके ब्लॉग को कुछ फायदे हो सकते हैं। 

  • बिना Seo किए और बैकलिंक बनाए अपने ब्लॉग पोस्ट को Google Discover में दिखा सकते हैं।
  • Seo किए बिना अपनी वेबसाइट या ब्लॉग पर ज्यादा ट्रैफिक ला सकते हैं।
  • अपने ब्लॉग पोस्ट को सही से ऑप्टिमाइज़ करते हैं तो आपका ब्लॉग पोस्ट भी Google Discover में आ सकता है।
  • ज्यादा शब्दों का आर्टिकल लिखने की जरूरत नहीं होती है।
  • Google Discover में ब्लॉग पोस्ट करने से ज्यादा Traffic मिलने की संभावना मिलती है।
  • गूगल डिस्कवर में ब्लॉग पोस्ट दिखाई देने से User Engegment बढ़ता है।

अपने ब्लॉग को Google Discover में कैसे ला सकते हैं – 2023

Google Discover में अपना ब्लॉग पोस्ट लाने के लिए आप नीचे बताए गए सभी पॉइंट्स को फॉलो कर सकते हैं। इसके बारे में गूगल ने अपनी Official Website में बताया है, जो हम आपको अपने आज के इस आर्टिकल में उन सभी प्वाइंट्स के साथ कुछ Extra Tips को Details में समझाने की कोशिश करेंगे। जिससे आपका ब्लॉग पोस्ट Google App में डिस्कवर हो सकता है।

#1. ब्लॉग को गूगल में इंडेक्स करना ज़रूरी है 

ब्लॉग पोस्ट गूगल में तभी दिखाई देंगी जब वह Google Search Console में Index होंगी। इसलिए अपने सभी ब्लॉग पोस्ट को और ब्लॉग को Google Search Console में पहले Index करना ज़रूरी है।

  • ब्लॉग को Google Search Console में सबमिट करें 

#2. Content को Informational बनाएं 

अपने ब्लॉग पोस्ट को ज्यादा Informational और Valuable बनाइए, इससे Users का Attention बन सकता है। ब्लॉग पोस्ट को Attractive और Unique बनाने की कोशिश करिए। कम से कम 600 – 1000 शब्दों का उपयोग कर सकते हैं। 

  • कंटेंट किसी दूसरी वेबसाइट से कॉपी पेस्ट नाही होना चाहिए।
  • कंटेंट में किसी तरह का Plagiarism नहीं होना चाहिए।
  • ब्लॉग पोस्ट में बुलेट्स पॉइंट्स और नंबर पॉइंट्स लिस्ट का इस्तेमाल करना चाहिए। 
  • हेडिंग और सब हेडिंग्स का सही से उपयोग करना चाहिए।

#3. ब्लॉग पोस्ट के Title को Clickable बनाएं 

ब्लॉग पोस्ट के Title को Catchy और Clickable बनाना होगा, उसके लिए टाइटल में Keywords का इस्तेमाल करना है। टाइटल को 50 से 70 कैरेक्टर का रखना चाहिए। 

#4. इमेज को हाई क्वालिटी का बनाएं 

ब्लॉग पोस्ट में इस्तेमाल होने वाली इमेज को हाई क्वालिटी का रखिए। पोस्ट में Webp इमेज का इस्तेमाल करना चाहिए। इसके अलावा इमेज का साइज 1200*630 या 1200*680 px पर रखना चाहिए। 

  • इमेज में max-image-preview:large Robot टैग लगाए। 
  • इमेज पर किसी तरह का Watermark नहीं होना चाहिए।
  • जिस Thumbnail इमेज का इस्तेमाल कर रहे हैं, उसको अपने ब्लॉग पोस्ट में इंट्रो से पहले रखिए।
  • इमेज में Alt Text, कैप्शन, टाइटल का इस्तेमाल करिए।

#5. ब्लॉग को मोबाइल फ्रेंडली बनाएं

अपने ब्लॉग को मोबाइल फ्रेंडली के लिए ऑप्टिमाइज करना ज़रूरी है क्युकी यह मोबाइल में एक Google App है। जिसमें जिसमे यह सभी Content दिखाई देते हैं। Amp का इस्तेमाल करके भी आप अपने ब्लॉग वेबसाइट को Google Discover में ला सकते हैं।

#6. ब्लॉग में Schema बनाएं

ब्लॉग पोस्ट को Google Discover में रैंक करने के लिए उसमे थोड़ा बहुत Seo करना ज़रूरी है। अपने ब्लॉग में स्कीमा मार्कअप, कीवर्ड, डिस्क्रिप्शन, इंटरनल और एक्सटर्नल लिंकिंग करना चाहिए।

#7. ट्रेंडिंग टॉपिक पर ब्लॉग पोस्ट लिखें

गूगल ट्रेंड्स का इस्तेमाल करके आप अपने ब्लॉग के लिए ट्रेंडिंग पोस्ट लिख सकते हैं।

वेबस्टोरीज बनाकर ब्लॉग को Google Discover में कैसे लाए 

Webstories बनाकर भी आप अपने ब्लॉग को Google Discover या Google App में ला सकते हैं और ज्यादा से ज्यादा ट्रैफिक ला सकते हैं।

वेबस्टोरीज क्या है – Google Discover Traffic 

वेबस्टोरीज Amp Technique की मदद से बनाई गई है। इसमें यूजर्स अपने पसन्द के टॉपिक को शॉर्ट स्टेटस के रूप में आसानी से देख सकते हैं।

वेबस्टोरीज बनाने के क्या फायदे हो सकते हैं

  • वेबस्टोरीज को Google App में पोस्ट करके जल्दी ही अपने ब्लॉग को डिस्कवर कर सकते हैं।
  • वेबस्टोरीज़ मोबाइल फ्रेंडली होती हैं, इसको Amp Technique का इस्तेमाल करके बनाया गया है।
  • वेबस्टोरीज Seo Friendly होती हैं।
  • वेबस्टोरीज यूनिक और क्रिएटिव होती हैं। जिससे यूजर्स का Engegment बढ़ता है और ब्लॉग पर ट्रैफिक आने की संभावना बढ़ जाती है।

WordPress पर Webstories कैसे बनाएं

Wordpress पर Webstories कैसे बनाएं

  1. आपको Webstories के लिए एक Plugin को Install करना है 
  2. आपको अपने WordPress के Admin Dashboard में Login करना है।
  3. Plugin के Option को Select करके Add New पर क्लिक करना है।
  4. Search Box में Stories लिखकर Search करना है।
  5. Web Stories या MakeStories में से किसी एक को इंस्टॉल करके एक्टिव करना है। 
  6. Webstories के नीचे Settings पर Click करना है।
  7. Publisher Logo में अपने ब्लॉग का Logo या Favicon इमेज को लगाना है।
  8. Create New Story पर क्लिक करके अपनी Webstories को बना सकतें हैं।

Blogger के लिए Webstories कैसे बनाएं

Blogger के लिए Webstories कैसे बनाएं

Blogspot या Blogge.com पर Webstories बनाने के लिए आपको एक वेबसाइट का इस्तेमाल करना है। 

  1. आपको Makestories.io वेबसाइट पर आना है और Sign Up For Free पर क्लिक करके Sign Up करना है।
  2. Create New Workspace पर क्लिक करके Create Workspace पर क्लिक करना है।
  3. अपनी वेबसाइट का Logo या Favicon इमेज को Add Picture पर क्लिक करके Add करना है।
  4. अपनी वेबसाइट का नाम Enter करना है।
  5. अपनी ब्लॉग वेबसाइट कि कैटेगरी को सिलेक्ट करके Continue पर क्लिक करना है।
  6. आप किसी को अपने Workspace में Add करना चाहते हैं तो उस Person की Gmail ID Enter करके Editor या Admin Select कर सकते हैं।

#1. Advance Settings कैसे करें 2023

  • Settings के ऑप्शन पर आना है और General SEO Settings करनी है।
  • Author Name और Publisher Name में अपना नाम या अपनी ब्लॉग वेबसाइट का नाम Enter करना है।
  • Author Type को Select करना है।
  • Story Language सिलेक्ट करना है।
  • अपनी Location Language सिलेक्ट करना है। ( जिस Language में आपका ब्लॉग है)
  • Save Details पर क्लिक करना है।

#2. Branding Settings

  • Brand का नाम Enter करना है।
  • अपनी ब्लॉग वेबसाइट की Category को सिलेक्ट करना है।
  • Logo, Favicon Add करके Save Details पर क्लिक करना है।

#3. Typography Settings

  • इसे ऐसे ही रहने दें, इसमें कोई छेड़छाड़ नहीं करना है।

#4. Analytics Settings

  • अपनी Google Analytics की ID को Paste करके Validate पर क्लिक करके Save Details पर क्लिक करना है।

#5. Social Media Settings

  • इसमें अपने Facebook, Twitter I’d को Enter करके Save Details पर करना है।
  • Advertising Setup Settings
  • अपना Monitization Mode On करना है।
  • कोई भी एक Option को Select करके Apply To All Story पर क्लिक करना है।

#6. Domain Settings

  • इसमें Add Domain पर क्लिक करके अपना Domain Add करना है।
  • अगर Domain नहीं है तो नीचे दिए गए Create Now पर क्लिक करके अपना Domain Create करना है।
  • Create New Story पर क्लिक करके आप अपनी Webstories Create कर सकते हैं।

9. Webstories बनाने के सबसे सही तरीके 

  1. Webstories की इमेज का साइज  होना चाहिए।
  2. कम से कम 5 Pages की Webstory बनानी चाहिए।
  3. इमेज में Alt Text को जरूर Add करना चाहिए।
  4. Tags में एक दो Keywords Add करना चाहिए।
  5. Permalink में Keyword का इस्तेमाल करना चाहिए।
  6. ट्रेंडिंग टॉपिक का उपयोग करना चाहिए।
  7. ट्रेंडिंग टॉपिक के लिए आपको Google Trends का इस्तेमाल करना चाहिए। 

निष्कर्ष – 

आज के आर्टिकल में हमने आपको Google Discover History क्या है, Google Discover से क्या फायदे हो सकते हैं। Google Discover Settings कैसे करें, Google App और वेबस्टोरीज क्या है – Google Discover Traffic और भी कई पॉइंट्स पर हमने बात की है।  

अगर आपको हमारा ये आर्टिकल पसंद आया है तो इस इनफॉर्मेटिव आर्टिकल को अपने दोस्तों के साथ सोशल मीडिया पर शेयर कर सकते हैं। आप हमारे Telegram Group को Join कर सकते हैं। 

हमारे ब्लॉग को Subscribe करना ना भूलें। Techaasvik ब्लॉग में आने के लिए आपका आभार, मिलते हैं अपने नए आर्टिकल के साथ धन्यवाद राधे राधे।

FAQs

Google App गूगल का एक प्रोडक्ट है, यह App Play Store पर मिल जायेगी। Google App में Users अपने मन मुताबिक न्यूज, आर्टिकल, यूट्यूब वीडियो, ब्लॉग पोस्ट को बिना सर्च किए पढ़ सकते हैं। 

February 4, 2024 0 comments
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keyword search Intent kya hai
Blogging Tips

SEO में Keyword Search Intent kya hai- 2024 में क्यों जरूरी

by Techaasvik January 27, 2024
written by Techaasvik

Keyword Search Intent kya hai– आजकल सभी अपने ब्लॉग या वेबसाइट को गूगल में रैंक करने के लिए लाइन में लगे रहते हैं। गूगल के SERP में रैंक करने के लिए अच्छी खासी कीवर्ड रिसर्च करनी पड़ती है। लेकिन क्या आपने Keyword Search Intent के बारे में सुना है? अगर नहीं, तो यह ब्लॉग पोस्ट आपके लिए है। 

Keyword Search Intent kya hai

जितना जरूरी SEO के लिए कीवर्ड रिसर्च है उतना ही जरूरी User Keyword Search Intent होता है। अगर आपने इसपर ध्यान नहीं दिया तो आप गूगल में रैंक नहीं कर पाएंगे।

अब गूगल SERP में सिर्फ कीवर्ड के आधार पर वेबसाइट को रैंक नहीं कराया जा सकता है क्योंकि गूगल ने अपने अल्गोरिथम में लगातार अपडेट किया है। इसका मुख्य कारण यूजर एक्सपीरियंस को अच्छा करना है। 

इसीलिए जिन वेब पेज में यूजर Query और यूजर सर्च इंटेंट को ध्यान में रखकर सही, शुद्ध और सटीक जानकारी दी जाती है। उन वेब पेज की रैंकिंग हमेशा अच्छी होती है। 

क्योंकि आज हम आपको बताएँगे कि Search Intent kya hai, यह SEO के लिए क्यों जरूरी है, इसे कैसे समझ सकते हैं और इसे कैसे ऑप्टिमाइज़ कर सकते हैं। 

Intent क्या है – सर्च इंटेंट का मतलब

Intent का हिंदी में मतलब इरादा या मकसद होता है। अब अगर इसे ब्लॉग्गिंग या वेबसाइट के कांटेक्स्ट में देखें तो, कोई यूजर किसी शब्द को सर्च इंजन में जिस मकसद से खोजता है। उसे इंटेंट कहा जाता है। 

Keyword Search Intent kya hai? (What is search intent in Hindi)

Keyword Search Intent का मतलब है, कि जब कोई व्यक्ति सर्च इंजन में किसी विषय को ढूंढता है, तो वह कुछ शब्दों का इस्तेमाल करता है। इन शब्दों को हम कीवर्ड (यूजर Query) कहते हैं। उस व्यक्ति का इन कीवर्ड को सर्च करने का कोई उद्देश्य या मकसद भी होता है, यूजर के इस इरादे को Search Intent या User Intent कहा जाता है।

जैसे :- कुछ यूजर सर्च Query के उदाहरण इस प्रकार हैं –

User Search QueryUser Intent
ब्लॉग कैसे बनायें?इसमें यूजर का Intent ब्लॉग बनाने का है।
गूगल सर्च कंसोल क्या है और इसमे Error क्यूँ आते हैं? यूजर गूगल सर्च कंसोल के बारे में जानना चाहता है।
Keyword क्या होते हैं और Keyword Research करने का सही तरीका क्या है? यूजर Keyword Research करने की जानकारी लेना चाहता है। 
सर्च Query के उदाहरण

दूसरे शब्दों में हम यह भी कह सकते हैं, कि किसी यूजर द्वारा सर्च इंजन में कीवर्ड को सर्च करने के पीछे जो मकसद होता है और इसे ढूंडकर यूजर क्या जानकारी लेना चाहता हैं, उसे सर्च इंटेंट कहते हैं।

इन कीवर्ड को अक्सर Google के Autosuggest, People also ask और रिलेटेड सर्च सेक्शन में देखा जा सकता है। इन कीवर्ड का इस्तेमाल आप अपने ब्लॉग पोस्ट का SEO करने के लिए कर सकते हैं। क्योंकि गूगल अब सर्च इंटेंट को अधिक महत्व देने लगा है। इसीलिए Keyword Search Intent को समझना बहुत जरूरी है।

Keyword Search intent क्यों जरूरी है – SEO के लिए 

गूगल लगातार अपने सर्च इंजन को बेहतर कर रहा है। इसीलिए गूगल के SERP (Search Engine Result Page) में रैंक करने के लिए अब सिर्फ एक अच्छा कीवर्ड ही काफी नहीं है। अब गूगल प्रतिदिन यूजर के Keyword search intent पर अधिक ध्यान दे रहा है। इससे यूजर को शुद्ध जानकारी प्राप्त होगी जो यूजर खोज रहा है।

इसीलिए गूगल समय-समय पर अपने अल्गोरिदम को अपडेट करता रहता है। सर्च इंटेंट को बेहतर बनाने के लिए कईं सारी अपडेट लाई जा चुकी हैं। जैसे Hummingbird, RankBrain, BERT आदि।

इसीलिए आपको SERP में रैंक करने के लिए User Search Intent को समझना जरूरी है। अपने ब्लॉग पोस्ट को इसके अनुसार बनाना जरूरी है। इसीलिए अपनी ब्लॉग पोस्ट को यूजर Query को ध्यान में रखकर लिखें, इससे आपका कंटेंट वैल्यूएबल और रिलेवेंट होगा।

नोट:- अगर आपका कंटेंट यूजर द्वारा सर्च किए गए कीवर्ड और यूजर के सर्च इंटेंट दोनों से मेल खाता है, तो आप SERP में अच्छा रैंक कर सकते हैं।

Keyword Search Intent के 3c क्या है 

सर्च इंटेंट को समझने और अपने कंटेंट को बेहतर बनाने के लिए इन्हें समझ लीजिए। सर्च इंटेंट समझने के लिए आपको पहले ये पता होना चाहिए, कि Keyword Search Intent Ke 3c Kya Hai, जो इस प्रकार हैं-

1. कंटेंट का प्रकार 

कुछ विशेष प्रकार का कंटेंट जैसे लैंडिंग पेज, ब्लॉग पोस्ट, विडियो, इमेज, लिस्ट, इन्फोग्रफिक्स, टेबल और प्रोडक्ट्स होता है जो SERP में देखने को मिलते हैं।

2. कंटेंट का फोर्मेट

कंटेंट का फॉरमेट आपके कंटेंट को अच्छे से दिखने में मदद करता है, जैसे- रिव्यु, केस स्टडी, ट्यूटोरियल और कम्पैरिजन, आदि।

3. कंटेंट का एंगल

जब यूजर कुछ खोज रहा होता है तो वह किस चीज को ज्यादा महतवपूर्ण समझता है। यह इसके बारे में बताता है। 

जैसे बेस्ट, चीपेस्ट, फास्टेस्ट, मोस्ट कम्प्रिहेंसिव, आदि।

आप Google Search Console का इस्तेमाल करके अपनी सर्च Query को देख सकते हैं। इससे अपने कीवर्ड के लिए कंटेंट का प्रकार, कंटेंट का फोर्मेट, कंटेंट का एंगल देख सकते हैं।

Search Intent के कितने प्रकार हैं

सर्च इंटेंट के कुछ प्रकार इस प्रकार हैं – 

  1. Information Search Intent (जानकारी लेने का मकसद)
  2. Navigation Search Intent (पथ-प्रदर्शन सर्च)
  3. Transactional Search Intent (लेन देन करने का इरादा)
  4. Commercial Search Intent (व्यवसायिक इरादा)

1. Information Search Intent (जानकारी लेने का मकसद)

जब कोई यूजर सर्च इंजन में किसी विषय को समझने के लिए खोज करता है, तो इसका मतलब यूजर विषय की जानकारी लेना चाहता है। इसीलिए इस तरह की यूजर Query या शब्दों को Informational कीवर्ड कहा जाता है। जब इन कीवर्ड का इस्तेमाल किया जाता है, तो आपको फीचर snippet भी देखने को मिलता है। 

अत: क्योंकि यूजर का मकसद जानकारी लेना होता है। इसीलिए हम इसे Informational Search Intent कहेंगे। 

इसके कुछ उदाहरण इस प्रकार हैं – 

  • पॉडकास्ट क्या है।
  • Google search console क्या है।
  • Core web vitals क्या है।

उदाहरण के लिए “पॉडकास्ट क्या है” को खोजने के पीछे यूजर का इंटेंट पॉडकास्ट के बारे में जानकारी लेना है।

2. Navigation Search Intent (पथ-प्रदर्शन सर्च)

जब कोई यूजर किसी विशेष वेब पेज को ढूंडता है, तो ऐसे शब्दों को नेविगेशनल कीवर्ड कहा जाता है। क्योंकि इन कीवर्ड को खोजने के पीछे यूजर का इरादा किसी विशेष पेज तक पहुंचना होता है। इसीलिए इसे नेविगेशनल सर्च इंटेंट कहा जाता हैं।

इसके कुछ उदाहरण इस प्रकार हैं- 

फेसबुक लॉग इन, जीमेल लॉग इन, Ubersuggest कीवर्ड टूल आदि।

3. Transactional Search Intent (लेन देन का मकसद)

जब कोई यूजर कुछ खरीदने या बुकिंग से सम्बन्धित कीवर्ड सर्च करता है, तो इस तरह के शब्दों को Transactional कीवर्ड कहा जाता है। क्योंकि इन कीवर्ड को खोजने का मकसद लेन-देन होता है। इसीलिए इसे Transactional Search Intent कहा जाता है। 

इसके कुछ उदाहरण इस प्रकार हैं- 

Best Mobile Under Rs.10000 – इस कीवर्ड को खोजने के पीछे यूजर का इरादा एक अच्छा फ़ोन खरीदना है।

3. Commercial Search Intent (व्यवसायिक मकसद)

कुछ यूजर किसी प्रोडक्ट को खरीदने से पहले उसकी Specification, वैल्यू, फीचर्स, रिव्यू और मूल्य को Compare करते हैं। यूजर द्वारा इस तरह के सर्च किए गए शब्दों को Commercial कीवर्ड कहा जाता है, इसीलिए इसे Commercial Search Intent कहा जाता है।

ऐसे यूजर्स का इरादा कुछ खरीदने का तो होता है, लेकिन यह खरीदने का पूरा मन अभी तक नहीं बना पाएं हैं। यही फरक Transactional और Commercial को एक दुसरे से अलग करता है।

यूजर कीवर्ड का Search Intent कैसे समझें

जैसा कि अब आप जानते हैं, कि यूजर द्वारा खोज किए शब्दों के पीछे यूजर का जो इरादा होता है। उसे सर्च इंटेंट कहते हैं। यूजर इंटेंट को उसकी सर्च Query के शब्दों से आसानी से समझा जा सकता है। आप इसे सर्च इंटेंट के प्रकार में भी पढ़ चुके है। कुछ टिप्स इस प्रकार हैं –

  1. Google Autosuggest  
  2. People also ask
  3. Related Searches
  4. Social Media
  5. Keyword Research Tools (Paid) जैसे- Semrush
  6. Google Search Console Queries

मैं आपको दो उदाहरण से समझाता हूँ-

  1. Buy Domain एक Transactional कीवर्ड है, और इसके पीछे यूजर का इंटेंट Domain खरीदना है। इसका मतलब यह Transactional Search Intent है।
  2. इसी प्रकार से कीवर्ड “How to buy a domain” एक Informational कीवर्ड है, क्योंकि यूजर इस कीवर्ड को सर्च करके Domain खरीदने की जानकारी लेना चाहता है। इसीलिए यह एक Informational शब्द है। इसका मतलब यह Informational Search Intent है।

इसी प्रकार आप यूजर के सभी खोजे गए शब्दों का सर्च इंटेंट आसानी से समझ सकते हैं। इसके अलावा Semrush Tool में सभी कीवर्ड का इंटेंट भी दिखाया जाता है, लेकिन यह एक Paid टूल है।

निष्कर्ष- Keyword Search Intent kya hai

आज मैने आपको इस लेख में Keyword Search Intent के बारे में बताया है। मैं आशा करता हूं, कि आपने आज के लेख में जाना होगा, कि SEO Mei Keyword Search Intent Kya Hai और यह 2024 में क्यों जरूरी है। आप अपने ब्लॉग रीडर्स के सर्च इंटेंट को समझ सकते हैं। 

अगर आपका इस लेख से जुड़ा कोई सवाल है, तो आप कॉमेंट करके पूछ सकते हैं। Keyword Search Intent Kya Hai इस लेख पर अपनी प्रतिक्रिया अवश्य दें। धन्यवाद राधे राधे।

January 27, 2024 0 comments
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Keyword Kaise Search Kare
Blogging Tips

Keyword Kaise Search Kare- 2024 में ब्लॉग का Seo करें 

by Techaasvik January 25, 2024
written by Techaasvik

अपने ब्लॉग को गूगल पर रैंक करने के लिए ब्लॉग का Seo करना जरुरी है। इसके लिए आपको अपने ब्लॉग कंटेंट में सही कीवर्ड का इस्तेमाल करना जरूरी होता है। एक सही कीवर्ड रिसर्च ब्लॉग के Seo को बेहतर बना सकता है। अगर आप ऐसे कीवर्ड को रिसर्च करते हैं, जो आपकी ऑडियंस को टारगेट करते हैं। तो इसका फ़ायदा यह होगा, कि इससे वेब पेज गूगल सर्च रिज़ल्ट के टॉप में आ सकता है। इसके लिए आपको यह जानकारी पता होनी चाहिए, कि Keyword Kaise Search Kare.

Keyword Kaise Search Kare

अगर आप यही जान लेते हैं, कि लोग गूगल पर क्या सर्च कर रहे हैं, किस कीवर्ड को ज्यादा सर्च किया जा रहा है। इसका फ़ायदा यह होगा कि इससे आपका वेब पेज भी गूगल सर्च रिज़ल्ट के टॉप में आ सकता है।
आज इस लेख में हम इसी टॉपिक पर चर्चा करेंगे, की कीवर्ड रिसर्च क्या है और इसे कैसे करें और कीवर्ड रिसर्च करते समय सबसे महत्वपूर्ण चीज क्या देखना है।

कीवर्ड क्या हैं

कीवर्ड एक शब्द है, जिसका उपयोग लोग सर्च इंजन में लिखकर अपनी क्वेरी को सर्च करने के लिए करते हैं। यूज़र एक कीवर्ड लिखकर अपने सवालों के जवाब सर्च रिज़ल्ट में देख सकता है।

गूगल सर्च इंजन में कीवर्ड की सहायता से वेब पेज के कंटेंट को पहचानता है, और एक निश्चित रैंकिंग पर रखता है। इसलिए कीवर्ड ब्लॉगिंग और एसइओ के लिए जरूरी होता है। 

कीवर्ड कैसे काम करते हैं

उदाहरण के तौर पर कहूं, तो अगर आप Motorola Moto g54 5g के रिव्यू जानना चाहते हैं, तो Google में Motorola Moto g54 5g Review लिखकर सर्च करेंगे। Google Bot आपके दिए गए कीवर्ड से जुड़ी जानकारी को ढूंढकर सर्च रिज़ल्ट में दिखाता है।

Seo में Keyword का महत्व क्या है 

अच्छे Seo के लिए On Page Seo का ठीक होना जरूरी होता हैं। क्योंकि अच्छा Seo आपके ब्लॉग को सर्च इंजन रिजल्ट पेज में एक पोजिशन बनाने में मदद करता है। समझने के लिए आपने एक नया Seo Friendly ब्लॉग पोस्ट लिखा। लेकिन आपके नए ब्लॉग पोस्ट के बारे में गूगल को कैसे पता चलेगा, कि आपका पोस्ट किस टॉपिक और किस सब्जेक्ट पर लिखा गया है। 

इसलिए Seo Friendly Article लिखने के लिए और गूगल को अपने ब्लॉग पोस्ट के टॉपिक को बताने के लिए सही तरीक़े से कीवर्ड प्लेसमेंट करना जरूरी होता है। 

Keyword Placement कहां करना जरूरी होता है

  • Meta Title में कीवर्ड का इस्तेमाल करें।
  • Image Alt Text में कीवर्ड का इस्तेमाल करें।
  • हेडिंग और सब-हेडिंग में कीवर्ड का इस्तेमाल करें।
  • ब्लॉग पोस्ट के पहले पैराग्राफ में कीवर्ड का इस्तेमाल करें।
  • Meta Description में कीवर्ड का इस्तेमाल करें।

कीवर्ड के कितने प्रकार हैं 

कीवर्ड भी अलग अलग प्रकार के होते हैं, यह छः प्रकार के होते हैं।

  1. LSI Keyword
  2. Fresh Keywords (Trending)
  3. Product Targeting Keywords
  4. Evergreen Keyword
  5. Customer Targeting Keywords
  6. Area Targeting Keywords

कीवर्ड रिसर्च क्या है

गूगल में अपने ब्लॉग को रैंक करने के लिए वेब पेज का सही तरीके से Seo करना जरुरी होता है। कीवर्ड रिसर्च करना Seo का ही एक जरूरी हिस्सा होता है।

कीवर्ड रिसर्च के फायदे क्या है 

Keyword Research करके आप अपनी सही ऑडियंस यानी ब्लॉग रीडर्स की पसंद के बारे में जान सकते हैं। कीवर्ड को सही तरीके से इस्तेमाल करके आप अपने कंटेंट की क्वॉलिटी को बड़ा सकते हैं। जिससे वेब पेज गूगल सर्च रिजल्ट में रैंक कर सकता है, इससे ब्लॉग पर ऑर्गेनिक ट्रैफिक आ सकता है। 

कीवर्ड रिसर्च के टूल्स

Keyword Research करने के लिए गूगल मार्केट में हर प्रकार के टूल मौजूद है। जिनमें से कुछ टूल्स प्रीमियम नहीं है, इस टूल इस्तेमाल आप कभी भी कर सकते हैं।

  • Keyword Planner Tool
  • Keyword Difficulty Checker
  • Ahrefs Tool 

1. Keyword Planner Tool का इस्तेमाल कैसे करें

  • सबसे पहले इसकी वेबसाइट Keyword Planner Tool पर आना है।
  • आपको “Go to Keyword Planner” के बटन पर सिलेक्ट करना है।
  • आपको यहां अपना अकाउंट बनाना है। इसके बाद आपको “Your Business Name” के बॉक्स में अपने बिजनेस का नाम लिखना है।
  • आपको अब एक नया बॉक्स दिखाई देगा, उसमें आपको अपनी वेबसाइट का लिंक पेस्ट करना है। 
  • Discover New Keywords पर सिलेक्ट करना है, और अपना कोई भी कीवर्ड टाइप करना है। 
  • अपनी कंट्री सिलेक्ट करनी है।
  • इसके बाद भाषा सिलेक्ट करनी है। 
  • Get Result के बटन पर सिलेक्ट करना है, इसके बाद बहुत सारे कीवर्ड आपके सामने दिखाई देने लगेंगे।

blogging kya hai

नोट: अगर आपको अपनी Website का लिंक चाहिए, तो आपको ब्लॉगर के डेशबोर्ड में आकर View Blog करना है। इसके बाद ऊपर होमपेज की लिंक को कॉपी करना है, ऐसा ही आपको वर्डप्रेस के होमपेज पर जाकर उसका लिंक कॉपी कर लेना है।

Keyword Difficulty कैसे पता करें

  • Keyword Difficulty Ahrefs की वेबसाइट को ओपन करना है।
  • इसमें अपना कोई एक Keyword Type करना करके कंट्री को सिलेक्ट करना है।
  • अब Check Keywords पर सिलेक्ट करना है।

keyword

Ahrefs Tool का इस्तेमाल कैसे करें

  • Ahrefs Keywords Research की वेबसाइट को ओपन करना है।
  • गूगल पर सिलेक्ट रहने दें और India को सिलेक्ट करना है। जिस कंट्री के कीवर्ड को सर्च करना है उस कंट्री सिलेक्ट करना है।
  • कीवर्ड टाइप करके Find पर सिलेक्ट करना है।
  • अपना सही कीवर्ड ढूंढने के बाद उस कीवर्ड की डिफिकल्टी और उसका सर्च वाल्यूम पता करें।

keyword

Keyword Density क्या है

Keyword Density का मतलब होता है, कि ब्लॉग पोस्ट में किसी एक कीवर्ड को कितनी बार यूज किया गया है। दूसरे शब्दों में कहूं तो आपके ब्लॉग पोस्ट में जितने वर्ड्स लिखें गए है, उसमें सेम कीवर्ड का कितनी बार इस्तेमाल किया गया है।

Keyword Density का फार्मूला और निश्चित स्कोर क्या है 

उदाहरण के तौर पर समझें- तो आपने अपने ब्लॉग में 1000 वर्ड्स का एक आर्टिकल लिखा है और उसमें “instastories. net” इस कीवर्ड का 10 बार यूज किया है, तो उसकी Keyword Density 1 होगी। 

निश्चित तौर पर देखा जाए तो ब्लॉग के अच्छे Seo के लिए Keyword Density का स्कोर 1% से 3% के तक का होना चाहिए। क्योंकि इससे सर्च इंजन को यह पता लगाने में मदद मिलती है, कि आपका वेब पेज किस विषय पर आधारित है। Keyword Density का सही इस्तेमाल करके, ब्लॉग के Seo में सुधार कर सकते हैं। 

लेकिन इस बात पर पूरा ध्यान रखना चाहिए, कि Keyword Density घटाने और बढ़ाने के चक्कर में आप अपने ब्लॉग में कीवर्ड का ज्यादा बार इस्तेमाल ना करें। क्योंकि इससे Keyword Stuffing जेसी समस्या आती है। 

कीवर्ड स्टफिंग क्या है 

एक शब्द को बार बार दोहराना इसी को Keyword Stuffing कहते हैं। गूगल में अपने वेब पेज को टॉप पर लाने के लिए यह तरीका गलत होता है, क्योंकि Seo पर इसका गलत असर पड़ता है।

कीवर्ड स्टफिंग के क्या नुकसान है

पैराग्राफ को समझाने के लिए या किसी भी कीवर्ड के साथ हेर फेर करने से वेब पेज की क्वालिटी खराब होती है। जिसके बाद यूज़र को पैराग्राफ समझने में परेशानी होती है, और बार बार एक शब्द को पढ़कर उसका विश्वास वेब पेज के प्रति कम हो जाता है। गूगल, Keyword Stuffing को सपोर्ट नहीं करता है, जिसकी वजह से वह वेब पेज को गूगल सर्च इंजन में नहीं रखता और सर्च इंजन से हटा देता है।

निष्कर्ष- Keyword Kaise Search Kare

आज इस लेख में मैने आपको बताया है, कि कीवर्ड क्या हैं और वे कैसे काम करते हैं, कीवर्ड रिसर्च क्यों महत्वपूर्ण है। कैसे आप अपने कंटेंट के लिए सही आडियंस को टारगेट करके अपनी वेबसाइट पर ऑर्गेनिक ट्रैफिक ला सकते हैं। 

आशा करता हूं, की आपको आज का लेख पसंद आया होगा। इस लेख को लेकर आपके मन में कोई सवाल है तो आप कॉमेंट करके पूछें। इसी के साथ लेख कैसा लगा इसके बारे में जरूर बताएं, धन्यवाद राधे राधे।

FAQs

1. How Do I Find The Best Keywords 2024.

इसके लिए कुछ टूल्स हैं, जैसे- Ahref Keyword Generator, कीवर्ड प्लेनर टूल और गूगल ट्रेंड.

2. How Do I Find The Right Keywords For Seo 2024.

सही कीवर्ड ढूंढने के लिए आप Seed keyword और Phrases का प्रयोग करें। क्योंकि Phrase या Seed Keyword एक या दो शब्दों के कीवर्ड होते हैं। जैसे- How To, How Can, Tech Tips इत्यादि।
आप इस तरह के Phrase किसी भी Keyword Tool में डालकर बोहोत सारे अच्छे कीवर्ड निकल सकते हैं।

3. How To Become An Seo Expert In 2024.

अगर आप SEO एक्सपर्ट बनना चाहते है, तो आपको किसी अच्छे Institution से Digital Marketing Course कर लेना चाहिए।

4. Is Seo Important In 2024?

जी हाँ, Digital Marketing की दुनिया में अगर आप अपना बिसनेस ऊंचाईयों पर ले जाना चाहते हैं, तो इसके लिए SEO बहुत जरूरी है। 

SEO किसी भी वेबसाइट या डिजिटल प्लेटफार्म के लिए उतना ही जरूरी है, जितना इंसान के लिए खाना पीना।
क्यूंकि अगर आप ब्लॉग का सही SEO नहीं करेंगे तो इससे आपका ब्लॉग गूगल में नहीं कर सकता है।

5. How To Rank On Google In 2024

गूगल में रैंक करने के लिए कई प्रकार के जरूरी फेक्टर होते हैं, लेकिन आपको इन कुछ ज़रूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए।
1.अपने ब्लॉग को मोबाइल और यूजर फ्रेंडली बनाएं।
2.हाई क्वालिटी कंटेंट को पोस्ट करें।
3.क्वालिटी बैकलिंक बनाएं।
4.सही कीवर्ड को अपने ब्लॉग कंटेंट में लगाएं।

6. What Seo Tool Is Best 2024

1. Ahrefs
2. SEMrush
3. Moz
4.Google Analytics

7. What Are The 4 Types Of Keywords 2024

1. Informational Keyword
2. Navigational Keyword
3. Commercial Keyword
4. Transactional Keyword

January 25, 2024 0 comments
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How to improve Largest Contentful Paint
Blogging Tips

Largest Contentful Paint (LCP) को ठीक करें: ये 10 चीजें करें

by Techaasvik December 20, 2023
written by Techaasvik

आपके ब्लॉग का परफॉरमेंस कितना बढ़िया है, यह LCP यानी Largest Contentful Paint पर डिपेंड करता है। अगर ब्लॉग या वेबसाइट का LCP सही है, तो इससे ब्लॉग की रैंकिंग और Users Experience बढ़ने में मदद मिलती है।  

How to improve Largest Contentful Paint

गूगल का कहना है, कि साल 2024 में LCP एक Ranking Factor बनेगा और यह Core Web Vitals का एक जरूरी हिस्सा होगा। ब्लॉग और उसके पेज की Loading Speed Increase करने के लिए आपको LCP पर ध्यान देना होगा, उसको ऑप्टिमाइज करना होगा।

मैने आपको अपने पिछले एक लेख में Core Web Vitals 2024 के बारे में विस्तार से बताया है। उसमें मैने आपको बताया कि यह Core Web Vitals क्या हैं, तथा LCP, FCP, FID, CLS, TTFB, TBT, Speed Index क्या होते हैं, इनके बारे में पूरी जानकारी दी है। लेकिन आज का पूरा लेख Largest Contentful Paint यानि LCP के बारे में है, जिसमें मैं आपको LCP को सुधारने के तरीके बताऊंगा। चलिए लेख को शुरु करते हैं-

LCP Metric क्या है

Largest Contentful Paint

Largest Contentful Paint Meaning – LCP गूगल के Core Web Vitals मैट्रिक्स का पहला और एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। क्योंकि LCP आपके वेबसाइट पर मौजूद सबसे बड़े एलिमेंट के लोड होने के समय को मापता है। यह एलिमेंट्स कुछ इस प्रकार हैं – 

  • टेक्स्ट ब्लॉक
  • इमेज 
  • पोस्टर इमेज 
  • एनिमेटेड इमेज
  • विडियो  

इसलिए हम कह सकते हैं, कि यह आपकी वेबसाइट के Loading Time को मापता है। इसलिए अपने यूजर्स को एक अच्छा वेब एक्सपीरियंस देने के लिए LCP स्कोर का अच्छा बहुत जरूरी है। 

गूगल इन एलिमेंट्स का साइज़ कैसे मापता हैं 

LCP के सभी एलिमेंट्स का साइज़ मापने के लिए Viewport का इस्तेमाल होता हैं आपकी वेबसाइट के Viewport में यूजर को जो एलिमेंट दिखाई देता है उस से इनका साइज़ मापा जाता हैं। 

Viewport क्या है 

वेबसाइट पर वेबपेज का वह हिस्सा होता है जो यूजर को दिखाई देता हैं उसे Viewport कहा जाता है इसका साइज़ सभी Device में अलग होता है जैसे – मोबाइल और लैपटॉप की स्क्रीन साइज़ अलग होता है इसीलिए Viewport भी अलग होता है। 

एक अच्छा LCP स्कोर क्या होना चाहिए 

Largest Contentful Paint Meaning

गूगल के अनुसार, अगर आप वेबसाइट पर एक अच्छा User Experience बनाए रखना चाहते हैं, तो आपका LCP स्कोर 2.5 सेकंड या इससे कम होना जरूरी हैं। इसके अलावा वेबसाइट के लोड टाइम को मोबाइल और डेस्कटॉप दोनों पर ऑप्टिमाइज़ करके रखना जरूरी है। यह भी ध्यान देना है, कि वेबसाइट पर आने वाले 75% यूजर के लिए वेबसाइट लोड होने में कितना समय ले रही है। यह टाइम 2.5 Sec के LCP स्कोर के कितना पास और दूर है। इसे हमेशा देखकर Optimize करके रखना है, इससे एक अच्छा User Experience बना रहेगा।

Largest Contentful Paint issue – इसके 10 उपाए

largest contentful paint how to improve

अपनी वेबसाइट के लोडिंग समय को बेहतर बनाने के लिए Largest Contentful Paint (LCP) को ठीक करना बहुत जरूरी है। लेकिन LCP को ऑप्टिमाइज करना आसान काम नहीं है, लेकिन इतना मुश्किल भी नहीं है। इसके लिए आपको कुछ जरूरी फैक्टर्स का ध्यान रखना होगा। इसको बेहतर बनाने के लिए कुछ सरल उपाय ये हैं।

  1. Images Optimize करें 
  2. Unused Plugins को रिमूव करें 
  3. Render-Blocking Resources को रिमूव करें  
  4. Server Response Time कम करें
  5. (CDN) Content Delivery Network को यूज करें
  6. Reliable Web Hosting Provider को चुनें 
  7. Caching Implement करें 
  8. Lazy Loading Issues Fix करें 
  9. JS, CSS, aur HTML Files को छोटा करें  
  10. Third-Party Scripts पर ध्यान दें 

1. इमेज Optimize करें 

वेबपेज कंटेंट की सभी इमेज को ब्लॉग या वेबसाइट पर Optimize करके लगाना जरूरी होता है, ऐसा नहीं करने से पेज का साइज़ बढ़ता है और होस्टिंग स्टोरेज भी ज्यादा इस्तेमाल होती है। 

इसे ठीक करने के लिए आपको ब्लॉग में कम साइज़ की इमेज का इस्तेमाल करना चाहिए। आप Jpg और Png फॉरमेट की इमेज की जगह कंटेंट में Webp के फॉर्मेट में इमेज का इस्तेमाल करें। जिससे इमेज मोबाइल और डेस्कटॉप दोनों स्क्रीन पर जल्दी से लोड हो सके। 

जरूरी बिन्दुं :- 

  • हमेशा वेबसाइट के मोबाइल Version में इमेज साइज़ Medium size पर सेट रखें। 
  • वेबसाइट के डेस्कटॉप Version में इमेज साइज़ को Large Size पर सेट रखे।  
  • आप अपने थंबनेल का साइज़ 150 पिक्ससेल वर्ग रखें। 
  • इमेज का Medium साइज़ 300 पिक्ससेल वर्ग और Large साइज़ 1024 पिक्ससेल वर्ग होना चाहिए।

इससे आप अपने ब्लॉग के Users Experience को Improve कर सकते हैं। Page की Loading Speed को सुधार सकते हैं, Seo Ranking Improve कर सकते हैं। Conversion Rate Improve कर सकते हैं।  

2. Unused Plugins को रिमूव करें 

वेबसाइट की लोडिंग स्पीड इसलिए भी कम हो सकती है। क्युकी आप ऐसी Plugins को डैशबोर्ड में इनस्टॉल करके रखते हैं, जिनका आप इस्तेमाल भी नहीं करते हैं। इसलिए आपको Unused Plugins को हटा देना चाहिए।

3. Render-Blocking Resources को रिमूव करें  

Render-Blocking Resources Kya Hai – वेबसाइट पर मौजूद कुछ ऐसी स्थिर फाइल होती हैं, जिनसे वेब पेज का पहला कंटेंट खुलने में देरी होती है। इन फाइलों को सीएसएस और जावास्क्रिप्ट कहते हैं। इन फाइल्स के कारण वेब पेज के एलिमेंट्स को एक साथ दिखने में समय लगता है। इससे वेबसाइट की स्पीड कम होती है।

अपनी वेबसाइट के Render-Blocking Resources को देखने के लिए आप गूगल के इन टूल्स का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। जैसे – 

  • Page-Insight
  • Chrome Dev Tool
  • Lighthouse 

Render-Blocking Resources को Remove करने के लिए उन फाइलों को Non Render केटेगरी में रखें जो वेब पेज पर पहला कंटेंट लोड होने के लिए जरूरी नहीं है।      

CSS और JS को पेज के आखिर में लगाना चाहिए-

आपको वेबसाइट की CSS और JavaScript को Defer या Async करना होगा। इसके लिए आप वेबपेज के एंड में इन CSS Files को लगा सकते हैं। 

इससे वेब ब्राउज़र पर पहले HTML और बाद में CSS फाइल लोड होती है। इसके कारण वेबसाइट की लोडिंग स्पीड बड़ने की संभावना बन जाती है। 

नोट:- Core Web Vitals Report और Website Speed में अच्छा स्पीड स्कोर बढ़ाना चाहते हैं, तो अपने ब्लॉग से Render Blocking Css और Javascript Files को रिमूव करना ज़रूरी है। 

आप WordPress की कुछ प्लगिंस का इस्तेमाल करके Render Blocking Resources को रिमूव कर सकते हैं। जैसे आप WP Rocket, Speed Booster Pack, Total Cache, Light Speed Cache जैसी plugins इस्तेमाल कर सकते हैं।

4. Server Response Time (SRT) कम करें

सर्वर रिस्पांस टाइम जैसा कि इसके नाम से ही पता लग रहा है, यह वो टाइम होता है जो किसी वेब सर्वर को यूजर के वेब पेज लोड करने की Request प्राप्त करने से लेकर उसका उत्तर देने में लग रहा है। उसे सर्वर रिस्पांस टाइम कहा जाता है। इसे कभी- कभी Time to First Byte यानी TTFB भी कहते हैं। 

Search Engine Optimization के लिए Server Response Time एक जरूरी हिस्सा है। अगर आपकी वेबसाइट का Server Response Time ज्यादा है, तो यूजर्स को वेबसाइट खुलने का इंतजार करना पड़ सकता है। इसका प्रभाव यह होता है कि यूजर वेबसाइट पर ज्यादा देर नहीं रुकता है। इसे गूगल खराब यूजर एक्सपीरियंस में आंकता है।

नोट:- इसमें उस टाइम को नहीं जोड़ा जाता है जो यूजर डिवाइस में डाटा को Rendor करने में लगा है 

5. CDN का इस्तेमाल करना चाहिए 

LCP को ठीक करने में CDN एक अहम भूमिका निभाता है। CDN जिसे Content Delivery Network कहा जाता है। इसका इस्तेमाल करके आप अपनी वेबसाइट की Speed Increase कर सकते हैं। क्योंकि CDN वेबसाइट के स्थिर एलिमेंट्स की कॉपी को अलग अलग सर्वर पर बना देता है। 

CDN इस्तेमाल करने का फायदा ये होता है, कि यूजर डिवाइस में आपकी वेबसाइट, उसके यानी यूजर के नजदीकी सर्वर से लोड हो जाती है। इस प्रकार आपके वेब होस्टिंग सर्वर पर लोड कम हो जाता है और LCP स्कोर भी अच्छा हो जाता है। यूजर को वेबसाइट पर सबसे बड़ा कंटेंटफुल पेंट जल्दी दिखने लगता है, जिससे वेबसाइट ज्यादा तेज़ स्पीड में काम करती है। 

आप Cloudflare CDN का इस्तेमाल कर सकते हैं, मैं भी काफी समय से इसका इस्तेमाल कर रहा हूँ। यह अपनी मुफ्त और प्रीमियम दोनों तरह की सेवाएं प्रदान करता है।

6. भरोसेमंद वेब होस्टिंग प्रोवाइडर चुनें

ऐसा माना जाता है, कि वेबसाइट की परफॉरमेंस हमेशा वेब होस्टिंग फीचर पर निर्भर होती है। इसीलिए हमेशा Core Web Vitals को ध्यान में रखकर ही वेब होस्टिंग को सिलेक्ट करना चाहिए। क्योकि एक अच्छी वेब होस्टिंग हमेशा बहुत सारे फीचर के साथ अच्छा परफॉरमेंस प्रदान करती है। ऐसी वेब होस्टिंग को सिलेक्ट करना सही रहता है, जो स्पीड, सिक्योरिटी, स्टेबल वेब होस्टिंग की सर्विस प्रोवाइड करे। इसलिए होस्टिंग लेने से पहले उसकी रेटिंग, रिव्यु और Specification की जांच पड़ताल कर लें। 

7. Caching चालू करें 

कैशिंग ऑन करके आप वेबसाइट की लोडिंग स्पीड को बेहतर कर सकते हैं। कैशिंग ऑन करते ही वेबसाइट के कुछ Static (स्थिर) Element, Temporary Memory में स्टोर हो जाते हैं, जैसे वेबसाइट का Logo, इमेज या विडियो आदि।

इससे फायदा यह होता है, कि जब भी यूजर दोबारा वेबसाइट पर आता है, तो यह फिक्स्ड एलिमेंट्स दोबारा डाउनलोड होने की जगह टेंपररी मेमोरी से लोड हो जाते हैं। इसीलिए वेबसाइट जल्दी लोड होने लगती है। 

ये Caching दो तरह के होते हैं।

  1. Browser Caching
  2. Server-Side Caching

1. Browser Caching

Largest Contentful Paint Meaning

वेब-ब्राउज़र में भी कैशिंग को ऑन रखना चाहिए क्यूंकि ऐसा करने से ब्राउज़र वेबसाइट के Static (स्थिर) Elements को याद रखता हैं। 

आप किसी भी वेब-ब्राउज़र में Caching को आसानी से ऑन कर सकते हैं वैसे तो कैशिंग पहले से ऑन रहती है, फिर भी आप Manually चेक कर लें। जब हम ब्राउज़र की History Clear करने जाते हैं, तो हमें Cache Memory में कितना डाटा स्टोर है। देखने को मिल जाता है, जैसा कि आप नीचे देख रहे हैं –

2. Server-Side Caching

सर्वर – यह एक कंप्यूटर सिस्टम है, जो नेटवर्किंग के द्वारा दुसरे कंप्यूटर को अपनी सेवा देता हैं। सर्वर पर डाटा स्टोर करने से लेकर मोबाइल एप्लीकेशन और वेबसाइट होस्टिंग तक सभी काम आसानी से हो जाते हैं। इसीलिए हम कह सकते हैं, कि जहाँ पर किसी वेबसाइट का डाटा स्टोर होता हैं, उसे सर्वर कहा जाता हैं।

इसी प्रकार सर्वर-साइड कैशिंग का अर्थ है, कि वेबसाइट का एक पेज या कुछ डाटा सर्वर पर स्टोर हो जाना इसीलिए जब यूजर आपकी वेबसाइट पर आता है तो सर्वर इस स्टोर किए गए डाटा को दिखा देता है जिससे वेबसाइट लोडिंग टाइम कम होता हैं। 

8. Lazy Loading Issues Fix करें 

क्या आप जानते हैं कि Lazy Loading क्या है, यह वेबपेज की शुरूआती Rendororing के दौरान Unnecessary CSS और बाकि सभी फालतू की फाइलों को शुरुआत में लोड होने से रोक सकते हैं। 

इससे जब यूजर किसी वेब पेज को ओपन करता है, तब उसके सामने सिर्फ वही चीज़े लोड होकर दिखाई देती हैं। जो यूजर के लिए जरूरी होती हैं। वेबसाइट की डिज़ाइन पर ध्यान देना जरूरी है, क्योंकि वेब पेज जल्दी लोड होने से इंटरनेट का इस्तेमाल कम होता है। 

अगर आपका वेब पेज ज्यादा लंबा है, और यूजर पेज को लंबे समय तक नीचे स्क्रॉल करता है। इसके लिए आपको Paginated Loading का सपोर्ट लेना चाहिए। यह वेब पेज को ज्यादा पार्ट में बांट देता है। जब यूजर वेबसाइट पर पहुंचता है, ये पार्ट तभी लोड होते हैं। Lazy Loading Issues Fix करने से वेबसाइट तेज और स्मूथली काम करती है।

9. JS, CSS और HTML Files को छोटा (Minify) करें 

Core Web Vitals में वेबसाइट की लोडिंग स्पीड सुधारने के लिए वेबसाइट की Javascript, HTML, CSS की फाइलों के कोड से Unnecessary Space, कमेंट और बाकि सभी बिना जरूरत की चीजों को हटाकर छोटा करना है। इससे वेबसाइट की स्पीड में सुधार देखने को मिलेगा।

10. Third-Party Scripts पर ध्यान दें

Third Party Script Code वह कोड होते हैं, जो दूसरे सोर्स जेसे Google Analytics, Customer Support Widgets से लोड होते हैं। ये कोड वेबसाइट पर अलग अलग तरीकों से असर डालते हैं, जिनके रिज़ल्ट कुछ गलत भी हो सकते हैं।  

  • वेबसाइट की लोडिंग स्पीड को कम कर सकते हैं, जिससे Largest Contentful Paint Issue Create हो सकते हैं।
  • वेबसाइट की Interactivity को कम कर सकते हैं, जिससे First Input Delay Issue को बड़ा सकते हैं।
  • वेबसाइट के लेआउट को अनचाहे तरीके से चेंज कर सकते हैं, जिससे Cumulative Layout Shift Issue को क्रिएट हो सकता है।
  • वेब पेज पर जरूरी Third Party Script Code को रखें, अन्यथा इसको हटा सकते हैं।

निष्कर्ष- LCP को Optimize करने का आसान फार्मूला

LCP Render-Blocking Resources में हुए सुधार को को देखने के लिए Core Web Vitals, First Contentful Paint, Largest Contentful Paint, Time to Interactive, Total Blocking Time, Cumulative Layout Shift, आदि का स्कोर चेक करें। इनके बारे में Detail जानकारी प्राप्त करने के लिए इस लेख को पढ़ें – 

  • Largest Contentful Paint Meaning
  • Core Web Vitals Inp Issues  
  • Google Core Web Vitals Inp 
  • Largest Contentful Paint WordPress

Core web Vitals क्या है – 2024 Tutorial

आज मैने आपको इस लेख में How to fix Largest Contentful Paint WordPress के बारे में जानकारी दी है। आशा है कि आपको आज का लेख पसंद आया होगा, जिसमें ये सभी पॉइंट्स को डिस्कस किया है।

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अंत तक पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद, राधे राधे।

December 20, 2023 0 comments
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core web vitals 2024
Blogging Tips

Core Web Vitals 2024: रैंकिंग के लिए पता होने चाहिए ये 5 चीजें

by Techaasvik December 12, 2023
written by Techaasvik

लेख एक नजर में – Core Web Vitals

आपने अपना एक ब्लॉग बनाया, और उसको आकर्षित बनाने के लिए जरूरी हाई क्वालिटी इमेजेस, टेक्स्ट, और विडियोज का इस्तेमाल किया। लेकिन जब हम इन्हें अच्छे से Optimize नहीं करते हैं, तो वेबसाइट पेज देरी से खुलता है। क्योंकि Images और Text को Optimize ना करने के कारण वेबसाइट की स्पीड कम हो जाती है। तब ज्यादातर यूजर पेज खुलने से पहले ही आपके ब्लॉग से चले जाते है। जिससे Users Experience खराब होता है, इसलिए वेबसाइट का जल्दी से खुलना जरूरी होता है। जिससे यूजर्स जल्द से जल्द जरूरी जानकारी तक पहुंच सके और आपके ब्लॉग वेबसाइट का Users Experience बना रहे।

Core Web Vitals

गूगल कहता है, कि लगभग 53% मोबाइल यूजर्स ऐसी वेबसाइट से तुरंत चले जाते हैं। जो खुलने में 3 सेकंड से ज्यादा का समय लेती हैं, इसीलिए वेबसाइट का लोडिंग टाइम 3 सेकंड से कम होना चाहिए। इसके अलावा वेबसाइट का Layout भी स्टेबल होना चाहिए, इसे बार बार बदलना नहीं चाहिए। 

यदि आप भी अपनी वेबसाइट के स्पीड, इंटरएक्टिविटी, विजुअल स्टेबिलिटी और Overall Performance को बढ़ाना चाहते हैं, तो Core Web Vitals को सुधारने पर ध्यान देना होगा। यह  वेबसाइट के मोबाइल फ्रेंडली, Https और Page Experience को बेहतर करने में सहायता करता है। इसके लिए इसे अच्छे से समझना जरूरी है।

इसीलिए आज मैं आपको Techaasvik Blog के इस लेख में बताने वाला हूं, कि ब्लॉग वेबसाइट खुलने में ज्यादा समय क्यों लेती है। इस प्रॉब्लम को कैसे सुधारा जा सकता है और इसकी वजह से आपकी ब्लॉग वेबसाइट के Seo पर क्या असर पड़ता है। चलिए लेख को शुरु करते हैं-

Core Web Vitals क्या है- What Are Core Web Vitals

Core Web Vitals क्या है

Core Web Vitals, यह भी Seo का ही एक हिस्सा है। ऐसा इसलिए क्योंकि यह कुछ ऐसी मैट्रिक्स का एक सेट है जो वेब पेज की लोडिंग स्पीड, रेस्पोंसिवेनेस, विजुअल स्टेबिलिटी,स्मूथ ट्रांजीशन और Overall यूजर Experience को मापते हैं। जिससे वेब पेज को रैंकिंग में सहायता मिलती है। गूगल अपने एल्गोरिथम में अपडेट करता रहता है, जिससे वह अपने यूजर्स को Good Experience प्रोवाइड कर सके। इसीलिए सभी को अपनी वेबसाइट के Core Web Vitals पर ध्यान देना चाहिए।  

Core Web Vitals क्यों जरूरी है 

Core Web Vitals क्यों जरूरी है

Core Web Vitals, Google के Page Experience स्कोर के लिए जरूरी होते हैं। गूगल ने इन वेब वाइटल का इस्तेमाल ब्लॉग पेज के User Experience की कॉलिटी को मापने के लिए बताया हैं। 

  1. वेबसाइट का Core Web Vitals सही होने से वेबसाइट यूजर इंगेजमेंट बढ़ता है। 
  2. वेबसाइट की लोडिंग स्पीड तेज हो जाती है। 
  3. वेबसाइट के Responsive, Stable Layout और अच्छी स्पीड होने से यूजर्स दोबारा आपकी वेबसाइट पर आने की सम्भावना बढ़ जाती है।
  4. अगर यूजर इंगेजमेंट बढेगा तो बाउंस रेट भी कम रहेगा।
  5. Overall आपके पेज Experience पर अच्छा प्रभाव होता है। 
  6. रैंकिंग में भी मदद मिलती है 

इसीलिए वेबसाइट के Core Web Vitals मैट्रिक्स का महत्व बहुत बढ़ जाता है। चलिए अब इसकी सभी मैट्रिक्स के बारे में जान लेते हैं फिर उन्हें ठीक कैसे करना है उसके बारे में जानेगे।  

Core Web Vitals के लिए जरुरी Metrics कौन सी है 

what is lcp
  • Largest Contentful Paint (LCP)
  • First Contentful Paint – FCP
  • First Input Delay (FID)
  • Cumulative Layout Shift (CLS)
  • Speed Index
  • Time to First Byte – TTFB
  • Total Blocking Time – TBT

1. Largest Contentful Paint (LCP)

एलसीपी से ये पता लगाया जा सकता है, कि आपका पेज कितने समय में या कितनी जल्दी खुलता है। इसलिए ब्लॉग को ऐसे डिज़ाइन किया जाता है, कि पेज में इस्तेमाल किए गए टेक्स्ट, इमेजेस या वीडियो 2.5 सेकंड में दिखाई देने लगे। जिससे ब्लॉग पर आने वाले किसी भी यूजर्स को पेज के खुलने का इंतेजार ना करना पड़े।

यह वह टाइम होता है जहाँ से आपका पेज लोड होना शुरू होता है और वहाँ तक मापा जाता है जहाँ तक वेबसाइट का सबसे बड़ा ब्लाक या टेक्स्ट दिखाई नहीं दे जाता है। 

2. First Contentful Paint – FCP

यूजर्स को वेबसाइट पर कंटेंट का पहला हिस्सा दिखने में जितना टाइम लगता है उसे FCP या First Contentful Paint का नाम दिया गया है, ये वो टाइम होता है। जब वेबसाइट का पेज लोड होना शुरू करता है, और इसे कंटेंट का पहला हिस्सा दिखने तक मापा जाता है। गूगल की अनुसार यह टाइम 1.8 sec या इससे कम होना चाहिए। 

3. First Input Delay (FID)

फर्स्ट इनपुट डिले से यह पता लगाया जा सकता है, कि आपका ब्लॉग आपके क्लिक का कितनी जल्दी से रिस्पॉन्स करता है। अगर आपका ब्लॉग आपके क्लिक का रिस्पॉन्स 100MS (मिलीसेकंड) समय में देता है, तो यह आपके ब्लॉग के लिए अच्छा है। गूगल जल्द ही मार्च 2024 में FID को लेकर एक नया रूल लागू करने वाला है, जिसमें FID की जगह INP को मिलेगी। 

INP क्या है – 2024 

INP (Interaction to next Paint) से यह पता लगाया जा सकता है, कि ब्लॉग आपके क्लिक का जवाब देती है। उसके बाद स्क्रीन पर कुछ भी एलिमेंट्स दिखाने में कितना समय लगता है।

4. Cumulative Layout Shift (CLS)

Core Web Vitals की यह मैट्रिक्स वेबपेज की विसुअल स्टेबिलिटी को मापने का काम करती है। इसका यह मतलब होता है, कि पेज लोडिंग के दौरान एलिमेंट्स कितना इधर- उधर हिलते हैं या मूव करते हैं।

ब्लॉग पर कंटेंट पढ़ते समय अचानक कंटेंट या कोई एलिमेंट्स इधर-उधर हिलती है। जिससे यूजर्स को किसी भी एलिमेंट्स को क्लिक करने में या कंटेंट पढ़ने में परेशानी होती है। तब सीएलएस से यह पता लगाया जा सकता है, कि ब्लॉग पर इस्तेमाल किए गए एलिमेंट्स कितने फास्ट और कितनी बार इधर-उधर होते हैं। ब्लॉग अच्छे से काम करे, इसके लिए CLS का स्कोर 0.1 से भी कम होना जरूरी है।

5. Speed Index

Speed Index (SI) से यह पता लगाया जा सकता है, कि वेबसाइट को ओपन करने पर उसके एलिमेंट्स, सारे पार्ट्स और कंटेंट को साफ दिखाने में कितना समय लगाती है। अगर आपकी वेबसाइट के पेज बिना देरी के जल्दी लोड हो जाती है, तो यह वेबसाइट के लिए अच्छा होता है।

6. Time to First Byte – TTFB

Time to First Byte (TTFB) से यह पता लगाया जा सकता है, कि वेबसाइट को ओपन करते समय उसका सर्वर आपके कंप्यूटर तक पहली जानकारी कितने समय में पहुंचाता है। अगर सर्वर 0.8 सेकंड से कम समय में आपके कंप्यूटर पर जानकारी दिखाता है, तो यह आपकी वेबसाइट के लिए अच्छा होता है।

7. Total Blocking Time – TBT

Total Blocking Time (TBT) से यह पता लगाया जा सकता है, कि वेबसाइट पर पहली बार कुछ एलिमेंट्स दिखाने के बाद Main Part के कॉन्टेंट को दिखाने में कितना समय लेता है। जब वेबसाइट पर 50MS (मिलीसेकंड) से ज्यादा समय तक पेज का पहला कंटेंट का पार्ट नहीं खुलता है, तो उसे Long Task कहते हैं। Long Task होने की वजह से यूजर वेबसाइट के साथ इंटरेक्शन करते समय उस काम को पूरा करने के लिए इंतजार करना पड़ सकता है।

Tools to Measure Core Web Vitals

Core Web Vitals

अपने ब्लॉग का Core Web Vitals स्कोर चेक करने के लिए और उसको सुधारने के लिए आप इन टूल्स का इस्तेमाल कर सकते हैं।

Google Search Console

गूगल की एक सर्विस है, गूगल सर्च कंसोल जिसमे आप अपनी वेबसाइट की परफॉर्मेस चेक कर सकते हैं। इसमें Core Web Vitals के सेक्शन में इसकी रिपोर्ट का पता लगा सकते हैं और उसको सुधार सकते हैं। इसके लिए आपका ब्लॉग गूगल सर्च कंसोल के साथ कनेक्ट होना चाहिए। 

GSC मोबाइल और डेस्कटॉप दोनों डिवाइस की एक रिपोर्ट देता है, जिसमें वेब पेज की परफॉरमेंस को तीन स्टेटस के बांट देता है।

  1. Good
  2. Need Improvement 
  3. Poor

Google Search Console का इस्तेमाल कैसे करें

Core Web Vitals को चेक करने के लिए Google Search Console का इस्तेमाल करने के लिए आप इन स्टेप्स को फ़ॉलो करें।

  • सबसे पहले आपको Google Search Console की वेबसाइट को ओपन करना है।
  • कंसोल के डैशबोर्ड में Enhancement के सेक्शन में जाकर Core Web Vitals के ऑप्शन पर सिलेक्ट करना है।

अगर आपको Core Web Vitals के सेक्शन में No Data Available का मैसेज दिखाई देने का मतलब है, कि आपकी वेबसाइट Google Search Console में नई है। उसमें डाटा अभी तक अपडेट नहीं हुआ है।

PageSpeed Insights

इस टूल कि सहायता से आप अपने ब्लॉग और ब्लॉग के पेज की परफॉर्मेस और पेज की स्पीड चेक कर सकते हैं। ये टूल आपको स्कोर और ब्लॉग के लिए सजेशन भी देता है, जिसे सुधारकर आप अपने Users Experience को बड़ा सकते हैं।

PageSpeed Insights का इस्तेमाल कैसे करें

PageSpeed Insights का इस्तेमाल करने के लिए आप इन स्टेप्स को फ़ॉलो करें।

  • सबसे पहले Google PageSpeed Insights की वेबसाइट को सर्च करके वेबसाइट को ओपन करना है।
  • जिस वेबसाइट की स्पीड स्कोर जानना है, उसका URL Enter करना है।
  • इसके बाद Analyze के बटन पर सिलेक्ट करना है।

Google PageSpeed Insights आपके द्वारा दिए गए, यूआरएल को एनालाइज करके मोबाइल और डेस्कटॉप दोनों डिवाइस की एक डिटेल रिपोर्ट बनाकर देता है। जिसमें स्कोर और एडवाइस बताता है, जिसको समझकर आप पेज को सुधार सकते हैं।

Lighthouse

इस टूल कि सहायता से आप अपने ब्लॉग की परफॉर्मेंस और भी कई Core Web Vitals से जुड़े कई Issue के बारे में पता कर सकते हैं। Lighthouse की रिपोर्ट की माध्यम से आप अपने ब्लॉग को इंप्रूव कर सकते हैं।

Lighthouse का इस्तेमाल कैसे करें 

  • इसके लिए आपको गूगल क्रोम ब्राउजर को ओपन करना है।
  • जिस ब्लॉग कि स्पीड चेक करनी है, उस ब्लॉग को ओपन करना है। 
  • ब्राउजर के ऊपर राइट साइड में थ्री डॉट्स पर क्लिक करना है।
  • इसके बाद More Tools पर जाना है।
  • Developer Tool के ऑप्शन पर सिलेक्ट करना है।
  • इसमें Lighthouse के ऑप्शन पर सिलेक्ट करना है।
  • यहां आप ब्लॉग की परफॉर्मेंस और कई इश्यू चेक कर सकते हैं।
  • इसके बाद Generate Report पर सिलेक्ट करके रिपोर्ट देख सकते हैं।

Chrome DevTools

यह टूल आपकी वेबसाइट को चेक करके उनके Issues को ढूंढने का काम करता है। इस टूल कि सहायता से आप अपनी वेबसाइट की परफॉर्मेस चेक कर सकते हैं और उसको सुधार सकते हैं। 

Chrome DevTools का इस्तेमाल कैसे करें

  • सबसे पहले Chrome Browser को ओपन करना है।
  • इसके बाद वेब पेज पर राइट क्लिक करना है।
  • Inspact के ऑप्शन पर सिलेक्ट करना है।
  • Elements के पैनल में उस वेबपेज के HTML और CSS को देख सकते हैं।

Web Vitals Extension

यह आपकी वेबसाइट के रियल टाइम Core Web Vitals के रिज़ल्ट दिखाता है। यह ब्राउज़र की एक एक्सटेंशन है, यह एक्सटेंशन आपको इंस्टेंट फीडबैक प्रोवाइड करता है। जिससे आप आसानी से अपनी वेबसाइट की परफॉर्मेस के बारे में जानकारी ले सकते हैं।

Web Vitals Extension का इस्तेमाल कैसे करें

  • सबसे पहले आपको Google Chrome Web Store से Web Vitals Extension को इंस्टॉल करना है।
  • इसके बाद Ambient Badge पर सिलेक्ट करना है। 
  • URL नेविगेट करते समय Badge हरे या लाल रंग में बदल जायेगा। 

निष्कर्ष- Core Web Vitals

मैने आपको इस लेख के माध्यम से बताया है, कि Core Web Vitals Kya Hai और Core Web Vital क्यों जरूरी होता है। मैं आशा करता हूं, कि आपको आज का यह लेख पसंद आया होगा। ब्लॉग पर आने के लिए आपका धन्यवाद, राधे राधे।

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Dedicated hosting Service
Blogging Tips

Dedicated Hosting Service: कस्टमाइजेशन से स्पीड और परफॉर्मेंस बढ़ाएं

by Techaasvik November 30, 2023
written by Techaasvik

Dedicated Hosting Service Meaning क्या आप अपनी वेबसाइट को फास्ट सिक्योर और भरोसेमंद बनाना चाहते हैं। अगर आप सच में ऐसा करना चाहते हैं, तो आपको Dedicated Hosting Service को इस्तेमाल करना होगा और इसके बारे में जानना और समझना होगा।  

Dedicated hosting service

Dedicated Hosting Service में आपको एक पूरा सर्वर सिर्फ आपकी वेबसाइट के लिए मिलता है। इसमें बहुत सारे Features का पूरा कंट्रोल आपके हाथ में होता है। आप इन फीचर को अपनी वेबसाइट के अनुसार इस्तेमाल कर सकते हैं, इसके अलावा इसके कुछ जरूरी फायदे देखने को मिलते हैं। जैसे कि –

  • High Performance के साथ जबरदस्त स्पीड देखने कि मिलती है। 
  • Enhanced Security मिलती है, क्योंकि सारी features का पूरा कंट्रोल दिया जाता है।
  • सर्वर Configuration अपने हिसाब से कर सकने के कारण कोई भी Plugin या सॉफ्टवेर आसानी से इंस्टाल कर सकते हैं, और इससे Customization में भी Help मिलती है। 

ये सब तो ठीक है, लेकिन Dedicated Hosting Service चुनने के लिए आपको कुछ बातों को जरुर से जरुर ध्यान रखना होगा। जो इस प्रकार हैं –

  • Hosting Cost कितनी है और आपके बजट में है या नहीं।
  • Hosting सपोर्ट सिस्टम कैसा है।
  • Hosting Features में क्या दिया गया है। 
  • सर्वर कॉन्फ़िगरेशन क्या दी गयी है।
  • Quality कैसी है। 
  • Hosting रिव्यु कैसे रहे हैं।

लेकिन आप इसे समझने के लिए एकदम सही जगह पर हैं, क्योंकि आज इस लेख में हम  Dedicated hosting Service के बारे में सभी महत्वपूर्ण जानकारी देंगे। जैसे – Dedicated hosting service कैसे काम करता है और इसका सही चुनाव कैसे करें इसके अलावा Dedicated Hosting कहाँ से और किस प्रोवाइडर से ले सकते हैं। इसके फायदे, Costing, Future Trend, Dedicated Hosting vs. Other Hosting Options, ऑप्टिमाइजेशन Tips और इसे क्यूँ और कब चुनना चाहिए, इन सभी पर बात करेंगे। 

अगर आप अपने ब्लॉग या वेबसाइट कि स्पीड और परफॉरमेंस बढाकर अपनी वेबसाइट को आगे बढ़ाना चाहते हैं, तो इस लेख को अंतिम तक जरुर पढ़ें और ब्लॉग को शेयर करें। 

Dedicated hosting service क्या होती है 

Dedicated hosting service क्या होती है 

Dedicated hosting service में प्रोवाइडर्स आपकी वेबसाइट के लिए एक Complete सर्वर देते हैं। जो ओर किसी के साथ भी शेयर नही होता है, और इसमें सभी Features का पूरा एक्सेस दिया जाता है। इसके अलावा आप अपने अनुसार सर्वर कॉन्फ़िगरेशन भी चुन सकते हैं।

उदाहरण – आपने एक पूरा घर रहने के लिए खरीद लिया है और इससे पहले आप कहीं एक कमरे में किराये पर रहते थे

Dedicated Hosting Service कितने तरह की होती है

Dedicated Hosting Service कितने तरह की होती है

Dedicated hosting service दो प्रकार की होती है।

  • Managed
  • Unmanaged

Shared or cloud hosting की बजाय Dedicated hosting service क्यूँ लें 

shared hosting vs dedicated hosting

आप शेयर्ड hosting और क्लाउड hosting या dedicated hosting तीनो में से किसको चुनना चाहते हैं यह आपके बिसनेस या आपकी आवश्कता पर निर्भर करता है, और आपकी आवश्यकताओं के बारे में आपसे ज्यादा कोई नहीं जान सकता है।

चलिए कुछ मुख्य कारण जान लेते हैं जो Shared hosting और Cloud hosting के बजाय dedicated hosting service के बारे में सोचने में मजबूर कर सकते हैं –

1. बेहतरीन Performance:

हर कोई अपनी वेबसाइट या ब्लॉग कि स्पीड बढ़ाना चाहता है ताकि अपने यूजर्स का भरोसा जीता जा सके।  Dedicated hosting service अपनी बेहतरीन परफॉरमेंस के लिए ही जानी जाती है, क्योंकि होस्टिंग प्रोवाइडर आपको बहुत सारे रिसोर्सेज इस्तेमाल करने को देता है जिनका पूरा कंट्रोल आपके पास होता है और इन रिसोर्सेज को आपको किसी के साथ भी शेयर नहीं करना पड़ता है, और आप सर्वर को अपने अनुसार इस्तेमाल कर पाते हैं। 

इसलिए dedicated hosting service में मैलवेयर और डाउनटाइम जैसी दिक्कतों का सामना करना नहीं पड़ता।

दूसरी और शेयर्ड hosting है, जैसा कि इसके नाम से ही पता लगा रहा है कि इसमें सर्वर को कई सारे यूजर्स इस्तेमाल करते हैं मतलब एक सर्वर को कई सारी वेबसाइट इस्तेमाल करती हैं और इनके रिसोर्सेज को भी उन सभी वेबसाइट के बीच शेयर किया जाता है। इसी कारण कई बार परफॉरमेंस कम देखने को मिल सकती है। 

इसके अलावा क्लाउड होस्टिंग में होस्टिंग प्रोवाइडर्स आपको सर्वर का एक नेटवर्क क्रिएट करके देते हैं जहाँ आपकी वेबसाइट का डाटा अलग अलग सर्वर पर डाल दिया जाता है लेकिन आपको सर्वर का पूरा कंट्रोल नहीं दिया जाता है।

2. जबरदस्त Customization:

Dedicated hosting में आप अपनी वेबसाइट को एक जबरदस्त लुक देकर अपने यूजर्स का ध्यान खींच सकते है  सर्वर का पूरा कंट्रोल होने के कारण आप सर्वर को अपने अनुसार configure कर सकते हैं और इसीलिए आप कोई भी सॉफ्टवेर या एप्लीकेशन या plugin आसानी से इनस्टॉल कर पाते हैं। इसके अलावा अगर किसी सेटिंग में फेरबदल करना चाहते हैं तो कर सकते हैं।

3. बेहतरीन Security:

आज डिजिटल युग में सिक्यूरिटी सबसे ज्यादा जरूरी होती है क्योंकि वर्तमान में साइबर अटैक और धोखाधड़ी बढती जा रही है इसीलिए सिक्यूरिटी को पहली प्राथमिकता दी जाती है, और इसीलिए Dedicated hosting service बहुत खास मानी जाती है, क्योंकि इसमें सिक्यूरिटी फीचर का पूरा कंट्रोल आपको मिलता हैं और आप आसानी से SSL certificate, backup, recovery, firewall, antivirus आदि को इनस्टॉल कर सकते हैं । जो आपकी वेबसाइट को धोखाधड़ी से बचने में सहायता करते हैं।

शेयर्ड होस्टिंग में आपको सर्वर की सिक्यूरिटी फीचर का पूरा कंट्रोल नहीं मिलता है और इस वजह से इसलिए आप सिर्फ वही फीचर इस्तेमाल कर पाते हैं जो प्रोवाइडर द्वारा उपलब्ध कराये गए हैं 

नोट:- यदि आप dedicated hosting service ले रहे है तो आपको कोडिंग का ज्ञान होना जरूरी है या आपके पास एक tech टीम होना चाहिए जो आपकी वेबसाइट को maintain रखे। क्योंकि dedicated hosting में आपको अपनी वेबसाइट के maintenance और ऑपरेशन पर खुद ध्यान रखना होता है।

इसके अलावा आप अपने बिसनेस, बजट और गोल को ध्यान में रखकर ही dedicated hosting को लेने के बारे में सोचें। क्योंकि यह hosting बड़े बिसनेस ग्रुप के लिए काफी लाभदायक होती है। वैसे तो इसे सभी तरह के बिसनेस के लिए उपयोग किया जा सकता है लेकिन छोटे बिसनेस के लिए आपको इसकी इतनी जरूरत महसूस नहीं होती है। इसके अलावा यह महंगी भी होती है, और इसीलिए अपने गोल को ध्यान में रखना ज्यादा जरूरी हो जाता है।

Dedicated hosting service के फायदे क्या हैं 

Dedicated hosting service के फायदे क्या हैं 

मैंने Dedicated Hosting Service लेने के कुछ फायदे के बारे में शेयर्ड hosting और क्लाउड hosting के साथ तुलना करके table के माध्यम से बताएं हैं –

HostingsDedicated SharedCloud
Unmatched PerformanceHigh Loading speed
Best Response time
Good Uptime
क्योंकि आपके पास रिसोर्सेज का फुल access होता है 
Low speed Low Response time
क्योंकि आपके पास सर्वर का पूरा कंट्रोल नहीं होता है और रिसोर्सेज भी limited मिलते हैं 
Moderate speed Moderate Response time, Moderate Uptime 
क्योंकि सर्वर पर कुछ हद्द तक कंट्रोल मिलता है 
Security FeaturesHigh 
सर्वर का फुल कंट्रोल होता है 

Low
सर्वर का लिमिटेड कंट्रोल होता है 
Moderate
सर्वर का थोडा कंट्रोल होता है 
Next Level CustomizationBest features वो भी फुल access के साथ Good featuresBetter features with limited access 
MaintenanceSelf––
CostExpensiveLow CostAverage
SupportHigh
Dedicated सपोर्ट मिलता है 
Low
क्योंकि सपोर्ट टीम shared यूजर्स को भी सपोर्ट देता है 
Moderate 
Technical knowledgeआपको Tech knowledge जैसे coding आना चाहिए या आपके पास एक tech टीम सपोर्ट होना चाहिए  Tech knowledge की आवश्यकता नहीं होती Tech knowledge की आवश्यकता नहीं होती 

अच्छा Dedicated hosting service प्रोवाइडर कैसे ढूंढे- 

अच्छा Dedicated hosting service प्रोवाइडर कैसे ढूंढे

Dedicated Hosting Service लेने के लिए आपको कुछ जरूरी बिन्दुओं को ध्यान में रखना है –

  • वेबसाइट का लक्ष्य और जरूरते
  • Specification और कॉन्फ़िगरेशन जैसे  – हार्डवेयर ( RAM, प्रोसेसर, स्टोरेज, स्टोरेज टाइप, Bandwidth और OS आदि )
  • होस्टिंग प्रोवाइडर रिव्यु और रेटिंग
  • कस्टमर सपोर्ट
  • Costing और Plans

इसके अलावा प्रोवाइडर की सर्विस लेवल अग्रीमेंट (SLA) को भज पढ़ लें, ताकि भविष्य में किसी दिक्कत का सामना न करना पड़े।

Dedicated hosting service को कब लेना चाहिए 

Dedicated hosting service को कब लेना चाहिए 

Dedicated Hosting Service को लेना तब आवश्यक हो जाता है। जब –

  • आपकी वेबसाइट पर बहुत ज्यादा ट्रैफिक होने के कारण स्पीड कम हो गयी हो।
  • आपकी वेबसाइट की overall परफॉरमेंस कम होने लगी हो।
  • आपकी वेबसाइट के रिसोर्सेज फुल होगए हों
  • आपकी वेबसाइट को हाई सिक्योरिटी की जरूरत महसूस हो रही हो। 
  • आपकी वेबसाइट पर आप कस्टम सॉफ्टवेर या ऐसे सॉफ्टवेर इनस्टॉल करना चाहते हैं। जो ज्यादा रिसोर्सेज का इस्तेमाल करते हो। जैसे- E- कॉमर्स वेबसाइट 

निष्कर्ष- Dedicated Hosting Service

Dedicated Hosting Service आपकी सफलता में एक स्मार्ट इन्वेस्टमेंट साबित हो सकती है। क्योंकि इसमें आपको बेहतरीन लोडिंग स्पीड, परफॉरमेंस और जबरदस्त Customization के ऑप्शन मिलते है। 

यह एक ऐसी हाई Quality Hosting होती है, जो बहुत सारे रिसोर्सेज, फीचर और पावरफुल सिक्यूरिटी के साथ मिलती है। इसे ऐसी वेबसाइट इस्तेमाल करती हैं, जिनपर ज्यादा ट्रैफिक आता हो और जिन्हें ज्यादा सिक्यूरिटी और रिसोर्सेज की आवश्यकता पड़ती है। 

नहीं, Dedicated Hosting सभी तरह के बिसनेस साइज़ के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है लेकिन आपके ऑनलाइन बिसनेस के साइज़ के हिसाब से आपको इसकी जरूरत है या नहीं यह उस पर निर्भर करता है क्योंकि ज्यादातर लोग इसे तब इस्तेमाल करते हैं जब उनकी वेबसाइट पर ट्रैफिक अधिक मात्रा में आने लगता है 

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google discover feed
Blogging Tips

ब्लॉगर ब्लॉग की पोस्ट को गूगल डिस्कवर में कैसे ला सकते है-समझें

by Techaasvik November 17, 2023
written by Techaasvik

आज के लेख में, मैं आपको ब्लॉग पोस्ट को 2024 में Google Discover Feed में लाने के 15 तरीकों के बारे में बताऊंगा। शायद कुछ लोगों को इन तरीकों के बारे में पहले से ही पता होगा। 

Google Discover Feed में लाने के 15 तरीके

आज का आर्टिकल उनके लिए है, जो लोग ब्लॉगिंग में नए हैं और अपने ब्लॉग पोस्ट को Google Discover Feed में लना चाहते हैं। अगर आप इन तरीकों को अपनाते हैं तो एक दिन आपका भी ब्लॉग पोस्ट Google Discover Feed में आ सकता है। चलिए लेख को शुरु करते हैं, Techaasvik Blog पर आपका स्वागत है।

मैने अपने पिछले एक लेख में गूगल डिस्कवर का मतलब क्या होता है, इसके बारे में विस्तार से बताया है। जिसमें मैने बताया है, कि Google Discover को Google Search Console में कैसे ऑन करना है। साथ ही कुछ टिप्स और पॉइंट्स को भी बताए हैं, जिससे आप अपने ब्लॉग पोस्ट को Google Discover Feed में ला सकते हैं। 

1. High Quality Images पर ध्यान दें 

Two contrasting images showcasing various types of images side by side

अपनी ब्लॉग पोस्ट में आप जितनी भी Images का इस्तेमाल करते हैं, उनकी चौड़ाई कम से कम 1200px होनी चाहिए। हमेशा अपने ब्लॉग में High Quality Images का इस्तेमाल करें, इमेज ब्लर ना हो और इमेज की ब्राइटनेस पर ध्यान रखें। इस तरह की किसी भी Images का इस्तेमाल नहीं करनी चाहिए जिससे किसी की भावनाओ को ठेस पहुंचे। इमेज के अंदर लिखा गया टेक्स्ट कंटेंट से मैच होना चाहिए। 

2. Image Preview पर ध्यान दें

Two images of different sizes and one with a small image.

आप अपने ब्लॉग पोस्ट में जितनी भी इमेज का इस्तेमाल करते हैं, उनका अधिकतम साइज Robot Meta Tags में Large पर सेट होना चाहिए। आप जानते ही होंगे, कि Max Preview इमेज में तीन ऑप्शन होते हैं। 

1. None

None पर सिलेक्ट करने से Google आपकी Image को Preview में नहीं दिखायेगा। 

2. Standard 

अगर आप Standard पर इमेज को सिलेक्ट करते हैं, तो इमेज का साइज छोटा दिखाई देता है।

3. Large

आपने देखा होगा कि, गूगल डिस्कवर में सबसे बड़ा एलिमेंट थंबनेल होता है और ज्यादातर High Quality Images होती हैं। इसलिए आप अपने वेब पेज में इमेज को Large पर सेट कर सकते हैं, जिससे आपकी ब्लॉग पोस्ट के Google Discover Feed में आने के अवसर बढ़ जाते हैं।

Note- अगर आप अपनी Images को Large पर सेट नहीं करते हैं, तो इसका सीधा मतलब होगा की गूगल के पास आपकी High Quality इमेज Google Discover Feed में दिखाने की परमिशन नहीं है। 

3. Logo का सही इस्तेमाल करें 

Logo का सही इस्तेमाल करें 

अपने ब्लॉग ओर वेबसाइट के Logo को अपने सोशल मीडिया पर नॉर्मल तरीके से इस्तेमाल नहीं करना है। अपने Logo को ब्लॉग के Header पर लगाना चाहिए, इसके अलावा Logo का कम से कम इस्तेमाल करना चाहिए। अगर आप Logo का इस्तेमाल Blog Graphics Image बनाने के लिए करते हैं तो उसको एक छोटे एलिमेंट के रुप में कर सकते हैं।

4. Meta Title पर ध्यान दें

Meta Title पर ध्यान दें

आपने देखा होगा कि गूगल डिस्कवर फीड में टाइटल अर्ट्रेक्टिव और कैची होते हैं। क्योंकि ब्लॉग कंटेंट को क्लिकेबल बनाने के लिए टाइटल का मुख्य रोल होता है। Meta Title ब्लॉग कंटेंट से Match होना चाहिए।

5. Title/Discription पर ध्यान दें

Feature Image, टाइटल और डिस्क्रिप्शन आपके ब्लॉग कंटेंट के अनुसार होना चाहिए। ब्लॉग का सीटीआर बढ़ाने के लिए किसी भी प्रकार की गलत इन्फॉर्मेशन नहीं देनी चाहिए।

6. Content पर ध्यान दें

अपने ब्लॉग पर Trending Topics पर आर्टिकल लिखना चाहिए, जिससे कंटेंट यूनिक बनता है। कंटेंट में यूजर्स के लिए इनफॉर्मेटिव नॉलेज देने की कोशिश करें, क्योंकि इससे यूजर्स का Experience बढ़ता है। 

7. Rss Feed पर ध्यान दें

ब्लॉगर ब्लॉग की पोस्ट को गूगल डिस्कवर में कैसे ला सकते है

अपने ब्लॉग में Rss Feed के ऑप्शन को इनेबल करना है।

8. Robot.txt में Rss Feed पर ध्यान दें

Robot.txt में Rss Feed पर ध्यान दें

आपको ध्यान देना है, कि Robot.txt में Rss Feed के URL का ऑप्शन Disallow या ब्लॉक पर सिलेक्ट नहीं होना चाहिए। RSS Feed ब्लॉक करने से Google Bot उन URLs को ट्रैक नहीं कर सकता है, जिससे Google Bot आपके ब्लॉग कंटेंट को नहीं पढ़ पायेगा। जिसका सीधा मतलब है, कि गूगल आपकी ब्लॉग पोस्ट Google Discover Feed में नहीं दिखा सकता है।

Feed Url क्यूँ बनते हैं-कैसे Disable करें

9. RSS/ATOM Feed पर ध्यान दें

RSS/ATOM Feed पर ध्यान दें

आपके ब्लॉग में Rss Feed और ATOM Feed को फॉलो करने का ऑप्शन इनेवल होना चाहिए। क्योंकि इससे ब्लॉग रीडर्स और Google के Bots को आपके ब्लॉग पेज को विजिट किए बिना उसकी Updates करने का फीचर देता है।

Note- आपको Check करना है, कि कोई क्रेशिंग प्लगिन RSS Feed को क्रेश नहीं कर रहा हो। सुनिश्चित करें कि आपका कैशिंग प्लगइन, जो प्रदर्शन बढ़ाता है, फ़ीड यूआरएल को कैश नहीं कर रहा है।

10. Rss Feed में Link Element पर ध्यान दें

Rss Feed में Link Element पर ध्यान दें

आपको अपने ब्लॉग के किसी भी Feed URL को ओपन करके Title और लिंक को Check करना है, कि वह URL में दिखाई दे रहे हैं या नहीं। क्योंकि कोई भी यूजर Google Discover Feed में आए Thumbnail पर सिलेक्ट करता है तो उसे Feed URL ना दिखाकर Page का Direct Link दिखाना जरूरी होता है। जिससे यूजर्स ब्लॉग पेज पर आसानी से पहुंच सकते हैं।

11. Google Guidelines पर ध्यान दें

अपने ब्लॉग पर किसी भी प्रकार के कंटेंट को पब्लिश नहीं करना है, जो गूगल की पॉलिसी के खिलाफ हैं। इसलिए गूगल की पॉलिसी को ध्यान में रखते हुए ही कंटेंट लिखें।

12. Sponsored Content पर ध्यान दें

ब्लॉग पर पब्लिश किए जाने वाले Sponsored Content और लिंक्स को अलग से मार्क करें, जिससे ब्लॉग पर आने वाले विजीटर्स को आपके ओरिजिनल कंटेंट और Sponsored Content की पहचान करने में आसानी मिल सकती है।

13. Political Content पर ध्यान दें

अगर आप अपने ब्लॉग पर Political Content या पॉलिटिकल पार्टी से जुड़ी जानकारियों को पब्लिश करते हैं। तो ब्लॉग में क्लियर करें, कि आप किस पॉलिटिकल पार्टी से जुड़े हुए हैं।

14. यूजर्स को अपने बारे में जानकारी दें

अपने ब्लॉग पेज और कंटेंट में ऑथर, पब्लिशर और वेबसाइट के बारे में जानकारी देनी चाहिए। जिससे यूजर्स को कंटेंट के पब्लिशर और वेबसाइट के बारे में जानकारी मिलने में मदद मिलेगी।

15. ब्लॉग पर दिए Contact Details पर ध्यान दें

ब्लॉग पर दिए गए, Contact Details को समय समय पर अपडेट्स करते रहना चाहिए। जिससे यूसर्स को आपके साथ कनेक्ट होने में किसी प्रकार की परेशानी का सामना ना करना पड़े। 

निष्कर्ष- ब्लॉगर ब्लॉग की पोस्ट को गूगल डिस्कवर में कैसे ला सकते है

मैने आपको इस लेख में Google Discover 2024 के बारे में बताया और 15 ऐसे तरीक़े बताएं हैं। जिनको अपनाकर आप अपने ब्लॉग पोस्ट को Google Discover Feed में ला सकते हैं। मुझे आशा है कि आपको आज का लेख पसंद आया होगा। अंत तक पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद, राधे राधे।

November 17, 2023 0 comments
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blogging tips in hindi
Blogging Tips

Blogger.com Hindi शॉर्ट ब्लॉगिंग कोर्स 2023: नए ब्लॉगर्स के लिए

by Techaasvik November 6, 2023
written by Techaasvik

ब्लॉगिंग क्या है– ब्लॉगिंग एक बहुत आसान तरीका है, जिसकी मदद से आप अपने विचारों को लिखकर दूसरों के साथ शेयर कर सकते हैं। जैसे – अगर आपको किसी भी फिल्ड का अनुभव है तो इसके बारे में लिखकर आप दूसरों की सहायता कर सकते हैं। लेकिन ब्लॉगिंग करने के लिए आपको एक प्लेटफार्म की आवश्यकता होती है। उसके लिए आप Blogger.com Hindi की सहायता ले सकते हैं। यह गूगल का एक पब्लिक प्लेटफॉर्म है, इस पर आप खुद का एक ब्लॉग बना सकते हैं।

blogging tips in hindi

आज हम आपको एक छोटे से ब्लॉगिंग कोर्स में ज्यादा से ज्यादा और Valuable जानकारी देकर सीखाने की कोशिश करेंगे । इस शोर्ट कोर्स से आप निम्नलिखित विषय सीख सकते हैं –

  • Blogger.com पर अपना पहला ब्लॉग बनाना 
  • ब्लॉग के लिए सही Theme को चुनना 
  • ब्लॉग को कस्टमाइज कैसे करें
  • ब्लॉग के लिए Topic कैसे तैयार करें
  • ब्लॉग की Settings और Advance Setting करना 
  • Robot.txt लगाना 
  • ब्लॉग के लिए जरूरी Pages बनाना 
  • ब्लॉग के लिए Trending Topic और Category ढूंडना
  • पहला ब्लॉग पोस्ट लिखने से पहले कुछ सुझाव और Structure
  • Keyword Research कैसे करें 
  • SEO क्या है 
  • Meta tags & Meta Description
  • ब्लॉग पोस्ट का SEO करना

आपका Techaasvik.com ब्लॉग पर स्वागत है, चलिए शॉर्ट ब्लॉगिंग कोर्स को शुरु करते हैं –

Blogger.com Hindi क्या है

Blogger.com Hindi क्या है

Blogger.com Hindi यह गूगल की एक वेबसाइट है, जिसमें आप अपने लिए खुद का एक ब्लॉग बना सकते हैं। अपनी किसी स्किल, अपने एक्सपीरियंस को दूसरो के साथ शेयर कर सकते हैं। इसके अलावा दूसरे सभी ब्लॉगर्स के साथ संपर्क भी कर सकते हैं। Blogging में अपने कैरियर को शुरु करने के लिए यह प्लेटफॉर्म सबसे अच्छा है।

अपनी एक Niche को सिलेक्ट करें 

ब्लॉग बनाने से पहले अपनी Niche को सिलेक्ट करना जरूरी होता है, क्युकी यही आपके ब्लॉग के टॉपिक्स को सही ऑडियंस तक पहुंचाता है। जिसकी वजह से ब्लॉग पर ट्रैफिक आता है। आपको किस Niche पर काम करना है, इसके लिए आप गूगल पर सर्च करके ढूंढ सकते हैं। ब्लॉग को बनाने से पहले इस स्टेप्स को फ़ॉलो करना ज़रूरी होता है। कुछ Niches के Ideas हम आपको नीचे बता रहे हैं –

  1. Educaton
  2. Health & Fitness
  3. Personal Finance 
  4. Technology
  5. Finance
  6. Travel 
  7. Blogging 
  8. Home Improvement 

Blogger.com हिंदी में अपना ब्लॉग कैसे बनाएं

ब्लॉग क्रिएट करने से पहले इन सभी जरूरी पॉइंट्स का ध्यान रखना है। 

#1. ब्लॉग का नाम बनाएं 

ब्लॉग का नाम किसी कीवर्ड को लेकर बनाने की कोशिश कर सकते हैं या अपने नाम पर भी ब्लॉग का नाम रख सकते हैं। कीवर्ड और अपने नाम के मिश्रण का इस्तेमाल करके भी ब्लॉग का नाम रख सकते हैं। उदाहरण के लिए- 

  • Techaasvik
  • Gkexamtak
  • Hinditechdr
  • Finanaceguru

#2. जीमेल आईडी बनाएं

अपने ब्लॉग के नाम से एक जीमेल आईडी बनाने की कोशिश कर सकते हैं। ब्लॉग के नाम पर जीमेल आईडी बनाने से आगे इसके कुछ फायदे मिल सकते हैं।

#3. Blogger.com को ओपन करना है

Blogger.com को

अपने फोन या लैपटॉप में क्रोम या किसी दूसरे ब्राउज़र को ओपन करना है। Blogger.com लिखकर सर्च करना है और वेबसाइट को ओपन करना है। Create a Blog पर सिलेक्ट करना है। 

#4. अपने Gmail I’d से अकाउंट बनाना है

जो हमने जीमेल आईडी बनाने का तरीका बताया है या अपनी किसी जीमेल आईडी से Blogger.com में अपना अकाउंट बना लेना है।

#5. ब्लॉग के Title को लिखना है

Blogger.com

Title में अपने ब्लॉग का नाम लिखना है। उदाहरण के लिए जैसे हमनें The Xyz Info लिखा है। वैसे ही जो आपने अपने ब्लॉग का नाम सोचा है, उसको Title में टाइप करना है।

#6. ब्लॉग का एक एड्रेस बनाना है

blogger.com

Title बनाने के बाद अब आपको अपने ब्लॉग का एक एड्रेस बनाना है, जिसे ब्लॉग का URL कहते हैं। यहां Address में अपने ब्लॉग का नाम लिखें। 

Blogspot.com यह Subdomain पहले से ही Blogger वेबसाइट में लगा मिलता है। Blog Address URL को बनाने के लिए आप अपने ब्लॉग के Niche या किसी कीवर्ड का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। उदाहरण के लिए आप इस URL Address को देख सकते हैं – Example.com

Blogger का Subdomain लगने के बाद आपके ब्लॉग का URL ऐसा बन जायेगा – Example.blogspot.com 

नोट- अगर आपका दिया हुआ Blog Address Available नहीं होगा तो आपको उसके नीचे एक लाल रंग की लाइन में Sorry, This Blog Address Is Not Found लिखा दिखाई देगा। अगर आपको नीचे This Blog Address Is Available दिखाई दे रहा है। इसका मतलब आप इस Address से अपनी Website का URL बना सकते हैं।

#7. Display Name लिखना है

जो आप अपने रीडर्स को कंटेंट में नाम दिखाना चाहते हैं, वो नाम Display Name में लिखना है। इसमें आप अपना या अपने ब्लॉग का नाम लिख सकते हैं। 

Blogger.com Hindi -अपने ब्लॉग के लिए एक Responsive Theme सिलेक्ट करें 

ब्लॉग को सुंदर और आकर्षक बनाने के लिए एक Responsive Theme को सिलेक्ट करना ज़रुरी होता है। 

एक Responsive Theme का काम होता है कि जो कंटेंट ब्लॉग पर पब्लिश किया जाता है, वह लैपटॉप, टैबलेट, कंप्यूटर और फोन के स्क्रीन साइज़ के अनुसार ढाल कर यूजर्स को दिखाए। यह ब्लॉग को यूजर के डिवाइस स्क्रीन साइज़ के अनुसार बदल देती है। जिससे ब्लॉग सभी डिवाइस में आसानी से तेज गति से खुलने में मदद करता है। क्योंकि अगर Theme ही सही नहीं होगी तो ब्लॉग भी अच्छे से कस्टमाइज नहीं कर सकते और बाद में गूगल सर्च कंसोल में काफी सारे Errors या अन्य दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।

एक अच्छी Theme में Speed Optimisation, Responsive, SEO Ready Theme, SEO Friendly, Lightweight, Fast Loading, Customizable जैसी सभी क्वॉलिटी होनी चाहिए।

कैसे पता करें Theme responsive है या नहीं 

आप रिस्पॉन्शिव थीम को तीन तारीकों से पता कर सकते हैं-

#1. पहला तरीका –

थीम Responsive है या नहीं यह चेक करने के लिए आपको ब्लॉग वेबसाइट को laptop ब्राउज़र में open कर लेना है। इसके बाद ब्राउज़र विंडो को छोटा करके देखना है। अगर ब्लॉग वेबसाइट भी ब्राउज़र विंडो के साथ अपना साइज़ बदल रही है इसका मतलब है कि आपकी थीम Responsive हैं।

#2. दूसरा तरीका- 

Laptop ब्राउज़र में अपनी वेबसाइट खोल कर Ctrl+Shift+I बटन दबाएँ और अलग अलग डिवाइस के हिसाब से Responsiveness चेक करें।

#3. तीसरा तरीका –

आप ऑनलाइन किसी Theme Responsiveness Checker टूल का इस्तेमाल कर सकते हैं।

Blogger.com Hindi के लिए कुछ बेहतरीन Responsive Theme 

Blogger.com Hindi के डैशबोर्ड में कुछ Themes पहले से होती हैं, अगर आप कोडिंग करना जानते हैं तो उन्हें अपने हिसाब से कस्टमाइज करके ब्लॉग में लगा सकतें हैं। लेकिन अगर आप कोडिंग नहीं जानते हैं या आपको वह थीम पसंद भी नहीं आ रही हैं तो आप Google से थीम टेम्पलेट को लेकर लगा सकते हैं। 

आप नीचे दी गयी कुछ Themes को इस्तेमाल कर सकते है इन Themes को हमारे टेलीग्राम चैनल से ले सकते हैं या इनकी ऑफिशियल वेबसाइट से भी ले सकते हैं।

  • Galaxy Theme
  • SuperMag Theme 
  • Litespot Blogger 
  • Tutorial Blogger Theme 
  • Pixy Newspaper 10 Theme 

#1. Blogger.com में Theme कैसे लगाएं

Theme को लगाने के लिए अपने Blogger.com Hindi के डैशबोर्ड में आना है और Theme के ऑप्शन को सिलेक्ट करना है। जो थीम Blogger.com Hindi में पहले से दी हुई हैं, उनमे से एक थीम को सिलेक्ट करके Apply को सिलेक्ट करना है। उदाहरण के लिए हम इस थीम को ब्लॉग के लिए सिलेक्ट करते हैं –

 Blogger.com में Theme कैसे लगाएं

#2. Blogger.com Hindi में Custom Theme को लगाना सीखें

अपने ब्लॉग में Custom थीम लगाने के लिए इन बिन्दुओं को पढ़ें। उदाहरण के लिए हम Galaxy Theme को लगाकर आपको समझा रहें हैं। 

Galaxy Theme
  • ब्लॉगर के डैशबोर्ड में Theme के ऑप्शन पर सिलेक्ट करना है।
  • Customise के साइड वाले Drop Menu में Restore के ऑप्शन को सिलेक्ट करना है।
  • Upload पर सिलेक्ट करना है।
  • जिस Theme को लगाना है उस फाइल को अपलोड करना है।
  • फिर एक बार Customise के Side वाले Drop Menu को सिलेक्ट करना है। 
  • नीचे Mobile Settings पर सिलेक्ट करना है और Desktop पर सिलेक्ट करके Save करना है।

Theme को कस्टमाइज कैसे करें

थीम को कस्टमाइज करके आप अपने ब्लॉग को एक अलग, सुंदर और नया रूप दे सकते हैं। जिससे आपका ब्लॉग और भी आकर्षित हो जाता है। अपनी आवश्यकता के अनुसार भी थीम में बदलाव कर सकते हैं। 

लेकिन ध्यान दें कि Blogger.com Hindi में Theme को अपने अनुसार कस्टमाइज करने के लिए आपको Html और Css की जानकारी होनी चाहिए। इसके अलावा यदि आपके पास Html और Css कोड हैं तो आप उन्हें थीम में लगाकर सुंदर बना सकते हैं। इसके अलावा आप एक प्रीमियम थीम टेम्पलेट भी ऑनलाइन खरीद सकते हैं। 

Theme Customize

थीम कस्टमाइज के Option में जाएँ। इसमें आप थीम का कलर और कुछ एडवांस थीम सेटिंग्स कर पाएंगे। सभी थीम में यह एडवांस सेटिंग नहीं होती है क्यूंकि सभी थीम में Css कोडिंग अलग अलग होती है। 

Layout Settings कैसे करें और किन बातों का ध्यान रखें 

Layout सेटिंग में आपको प्राइमरी मेनू, फूटर मेनू, राइट साइडबार मेनू, लोगो और सोशल मीडिया लिंक को सेटअप करना होता है। इसीलिए ध्यान दें, यह स्टेप बहुत ज्यादा ध्यान से और सोच समझकर करना होता है क्यूंकि मेनू के नाम बार-बार बदलने से आपको गूगल सर्च कंसोल में कुछ दिक्कतों को सामना करना पड़ सकता है। इसीलिए अच्छा होगा कि आप ब्लॉग का मेनू सोच समझकर ही बनाएं।

ब्लॉग मेनू अपने ब्लॉग की Category से Related बनाएं और ऐसे मेनू बिलकुल ना बनाएं जिनका मीनिंग Same हो। जैसे – Blogging Tips और Blogging

मैं गैलेक्सी थीम की Settings के बारे में बता रहा हूँ आपके पास Options अलग दिख सकते हैं लेकिन Settings Same ही होती है इसीलिए ध्यान से समझकर करें या आप हमें Comment करके भी पूछ सकते हैं। अब सबसे पहले Canva.com पर जाकर अपने ब्लॉग के लिए एक बढ़िया लोगो बना लें।

अब आपको Blogger.com hindi Dashboard में Layout में आना है।

Main Menu / Primary Menu 

  • टॉप मेनू में जाकर Link list पर आकर मेनू Create करने के लिए Add A New item में जाएँ।
  • अब Site Name में पेज का नाम टाइप करें जैसे – Blogging Tips 
  • Site URL में आपको इस Menu का Url डालना है।

जिस मेनू का लिंक लगाना चाहते हैं उस मेनू के लिए एक पोस्ट लिखें और लेबल में इस मेनू का Tag डाल दें जैसे – Blogging Tips इसके बाद पोस्ट को खोल कर सबसे नीचे चले जाएँ और Tag पर क्लिक करें और Addressbar से लिंक कॉपी कर लें। अब इस केटेगरी के लिंक को Site Url में Paste कर दें।

अब Save कर दें। आपको इसी तरह से Primary मेनू बनाने होगे जैसे –  Blogging, Seo, WordPress आदि।

नोट:- अगर आप Sub Menu बनाना चाहते हैं तो आपको Site Name के आगे एक अंडरस्कोर का इस्तेमाल करना होगा जैसे अगर आप Seo के नीचे Off Page Seo नाम की Sub Menu बनाना चाहते हैं तो टाइप करें -_Off Page Seo     

Top Menu / Secondary Menu 

  • यह मेनू Primary मेनू के उपर दिखाई देती है, 
  • टॉप मेनू में जाकर लिंक लिस्ट पर आकर मेनू क्रिएट करने के लिए Add A New Item में जाएँ।
  • अब Site Name पेज का नाम टाइप करें उदाहरण के लिए- Home.
  • Site URL में आपको होमपेज का Url डालना है जैसे – https://techaasvik.com/  अब save कर दें।
  • आपको इसी तरह से सभी Pages मेनू बनाने होगे जैसे – About Us, Contact Us, Privacy आदि।

नोट:- अगर आप Sub Menu बनाना चाहते हैं तो आपको site name के आगे एक अंडरस्कोर का इस्तेमाल करना होगा जैसे अगर आप About Us के नीचे Contact नाम की Sub Menu बनाना चाहते हैं तो टाइप करें -_contact

Top Social icons / Follow Us

Blogger.com Hindi में सोशल आइकॉन लगाने के लिए भी आपको टॉप सोशल Icons में जाकर Link List बनानी होगी। जैसे Site नाम में Facebook लिखें और Site Url में अपने Facebook Account का लिंक डालें – https://facebook.com/techaasvik

Main Logo

इसमे जाकर Upload Image From Computer पर जाएँ और अपना लोगो Upload कर दें यह Process फूटर के लिए भी करना है।

Right Sidebar

इसमें आप पोपुलर पोस्ट, केटेगरी या लेबल, About, Search Blog आदि लगा सकते हैं या अपने अनुसार भी कुछ रख सकते हैं। यह सब आप Add A Gadget में जाकर Add सकते हैं।

Main Recent Posts

इसमें जाकर आप रीसेंट में लिखी हुई पोस्ट को अपने Homepage पर दिखाने के लिए सेट कर सकते है। जैसे कि आप 5 पोस्ट दिखाना चाहते हैं तो Number of Posts on Main Page में 5 टाइप करें और Save करें।

Footer Menu

अपने ब्लॉग की फूटर मेनू में आप यह लिंक list बनाएं – Home, About, Contact us, Privacy Policy, Disclaimer.

आप अपनें हिसाब से थीम के Layout को Customise कर सकते हैं क्युकी हर थीम के Layouts अलग-अलग हो सकते हैं।

Blogger.com में Advance Settings कैसे करें

थीम लगाने के बाद Blogger.com Hindi में कुछ ज़रुरी सैटिंग्स करनी ज़रुरी होती हैं, जिससे गूगल में सर्च करने से आपका ब्लॉग आसानी से दिखाई देता है। सैटिंग्स करने के बाद ब्लॉग सही तरीके से काम करता है। सैटिंग्स करने के लिए Blogger.com Hindi के डैशबोर्ड में आना है।

Description लिखें 

अपने ब्लॉग के लिए एक डिस्क्रिप्शन लिखना है। जो कम से कम 500 कैरेक्टर्स का इस्तेमाल करके बनाना है, इसमें अपनी Niche के अनुसार कुछ कीवर्ड्स को भी शामिल कर सकते हैं।

Blog Language सिलेक्ट करें 

इसमें आपको अपने ब्लॉग की भाषा सिलेक्ट करनी होती है, उदाहरण के लिए हम हिंदी भाषा को सिलेक्ट कर लेते हैं। आप कोई भी भाषा को सिलेक्ट कर सकते हैं।

Privacy

  • इसमें आपको विजिबल टू सर्च इंजन के ऑप्शन को ऑन पर ही रखना है।
  • Https को एनेबल करना 
  • इसमें आपको Https Redirect के ऑप्शन पर सिलेक्ट करके ऑन करना है। 
  • Comments Moderation को सिलेक्ट करें 
  • इस ऑप्शन में आपको “Never” से हटाकर “Always” पर Select करना है, इसकी मदद से आपके ब्लॉग पर कोई स्पैम कॉमेंट नहीं कर सकता है।

Formatting को सिलेक्ट करें 

  • इसमें आपको अपनी कंट्री के अनुसार टाइम जोन को सिलेक्ट करना है। उदाहरण के लिए इंडिया को सिलेक्ट करते हैं तो इसका टाइम जोन (GMT+05:30) India Standard Time – Kolkata” को सिलेक्ट करना है।
  • Meta Tags को सिलेक्ट करें 
  • इसमें Enable Search description के इस ऑप्शन को ऑन पर सिलेक्ट करना है। 
  • Search Description में आपको कुछ मेटा टैग का इस्तेमाल करना है। कम से कम इसको 150 वर्ड्स में लिख सकते हैं। इसके अलावा आप अपने Niche के अनुसार कीवर्ड का इस्तेमाल भी कर सकते हैं। 

Crawlers And Indexing को सिलेक्ट करें

इसमें आपको Enable Custom Robots. Txt के ऑप्शन को ऑन पर सिलेक्ट करना है।

Robot.txt

इसमें आपको एक Custom Robots.Txt फाइल को लगाना होता है। जिसमें अपने ब्लॉग का साइटमैप नेविगेशन को बनाकर Robot.Txt में लगाना होता है, जिसकी मदद से आपका ब्लॉग गूगल सर्च में सबमिट होता है। 

Robots Header Tags को सिलेक्ट करें

Enable Custom Robots Header Tags के ऑप्शन को ऑन पर सिलेक्ट करना है। 

Home Page Tags 

इसमें आपको “All” , “Noodp” को सिलेक्ट करके सेव करना है। 

Archive and Search Pages Tags

इस ऑप्शन को ओपन करके आपको “Noindex” , “Noodp” को सिलेक्ट करना है और सेटिंग को सेव करना है। 

Post And Pages 

इस ऑप्शन को ओपन करके आपको “All” , “Noodp” को सिलेक्ट करना है और सेटिंग को सेव करना है।

Blogger.com में जरूरी Pages कैसे बनाएं 

ब्लॉग बनाने के बाद कुछ जरूरी Pages को बनाकर अपने ब्लॉग में लगाना जरूरी होता है। गूगल के अनुसार ये Pages ब्लॉग में होने जरूरी होते हैं,  जो नीचे बताए गए हैं।

Privacy Policy

ब्लॉग में Privacy Policy का पेज लगाने से आपका ब्लॉग प्रोफेशनल लगता है। जिससे गूगल और ब्लॉग पर आने वाले सभी विजीटर्स आपके ब्लॉग पर विश्वास कर सकते हैं की आपका ब्लॉग उनके लिए भरोसेमंद है। प्राइवेसी पॉलिसी पेज ना होने की वजह से आपके ब्लॉग को नुकसान भी हो सकता है। इस पेज को बनाने के लिए इन स्टेप्स को फ़ॉलो करें –

  • Privacy Policy के जेनरेट टूल को ओपन करना है।
  • अपने ब्लॉग का नाम लिखना है।
  • अपने ब्लॉग का URL लिखना है।
  • अपनी ईमेल पता लिखना है।
  • Cookies का इस्तेमाल करते हैं तो Yes नहीं करते हैं तो No पर सिलेक्ट करना है।
  • थर्ड पार्टी सर्विस में जो ऑप्शन दिए हैं, उनका इस्तेमाल करना है तो Yes नहीं करना है, तो No पर सिलेक्ट करना है।
  • दी गई जानकारियों को चेक करके Generate Code पर सिलेक्ट करना है।
  • पूरे कोड को कॉपी करना है।
  • ब्लॉगर डैशबोर्ड में Page के सेक्शन में आकर New Page पर सिलेक्ट करना है।
  • Title में Privacy Policy लिखना है।
  • कॉपी किए गए कोड को Content में पेस्ट करके Privacy Policy के पेज को पब्लिश करना है।

Terms & Conditions

ब्लॉग पर आने वाले सभी विजीटर्स को इस पेज की मदद से आपके ब्लॉग के बारे में जानकारी मिलती है। कि उन्हे किन किन बातों का ध्यान रखना है और आपके ब्लॉग पर कितने प्रकार की शर्ते लागू की गई हैं। 

Terms & Conditions की मदद से ब्लॉग को सुरक्षा मिलती है। जिससे ब्लॉग पर आने वाले कॉपीराइट नीति या प्राइवेसी, जैसी कुछ समस्याओं से छुटकारा मिल सकता है। इस पेज को बनाने के लिए इन स्टेप्स को फ़ॉलो करें –

  • Terms & Conditions के जेनरेट टूल को ओपन करना है।
  • अपने ब्लॉग का नाम लिखना है।
  • अपने ब्लॉग का URL लिखना है।
  • अपनी ईमेल पता लिखना है।
  • दी गई जानकारियों को चेक करके Generate Code पर सिलेक्ट करना है।
  • पूरे कोड को कॉपी करना है।
  • ब्लॉगर डैशबोर्ड में Page के सेक्शन में आकर New Page पर सिलेक्ट करना है।
  • Title में Terms & Conditions लिखना है।
  • कॉपी किए गए कोड को Content में पेस्ट करके Terms & Conditions के पेज को पब्लिश करना है।

Disclaimer

इस पेज की मदद से आप अपने ब्लॉग पर आने वाले विजीटर्स को अपने ब्लॉग का उद्देश्य बताते हैं। कि आपके ब्लॉग पर पोस्ट होने वाली सभी जानकारियां नॉलेजिएबल या एजुकेशनल होती हैं। 

जिनसे आपका कोई वास्तविक निजी मतलब नहीं होता है। Disclaimer Page की मदद से आप अपने ब्लॉग पर कानूनी या अलग हानि देने वाली चीजों से दूर रख सकते हैं। इस पेज को बनाने के लिए इन स्टेप्स को फ़ॉलो करें-

  • Disclaimer के जेनरेट टूल को ओपन करना है।
  • अपने ब्लॉग का नाम लिखना है।
  • अपने ब्लॉग का URL लिखना है।
  • अपनी ईमेल पता लिखना है।
  • दी गई जानकारियों को चेक करके Generate Code पर सिलेक्ट करना है।
  • पूरे कोड को कॉपी करना है।
  • ब्लॉगर डैशबोर्ड में Page के सेक्शन में आकर New Page पर सिलेक्ट करना है।
  • Title में Disclaimer लिखना है।
  • कॉपी किए गए कोड को Content में पेस्ट करके Disclaimer के पेज को पब्लिश करना है।

About Us

इस पेज की मदद से आप अपने विजीटर्स को अपने ब्लॉग के साथ कनेक्ट होने की वजह देते हैं। जिसमें आप अपने ब्लॉग के बारे में, अपने बारे में जानकारी दे सकतें हैं। अपनी टीम मैंबर्स, कॉन्टैक्ट की जानकारी, और भी जानकारी आप About Us के पेज में दे सकतें हैं। About Us के पेज को इंप्रेसिव बनाने के लिए आप इन तरीकों को अपना सकते हैं।

  • अपने ब्लॉग का Introduction लिखना है।
  • अपने ब्लॉग के Goal को साफ तरीके से समझाएं कि इस ब्लॉग से विजीटर्स को क्या फायदे मिलेंगे।
  • अपने ब्लॉग की स्टार्टिंग या स्टोरी लिख सकते हैं। 
  • अपनी हॉबीज, इंट्रेस्ट, एजुकेशन, अपनी स्किल के बारे में बता सकते हैं।
  • अपने ब्लॉग के रीडर्स के साथ कनेक्ट होने के लिए सोशल मीडिया अकाउंट्स को शेयर कर सकते हैं।
  • अपने About Us के पेज को Mobile Usability को ध्यान रखकर डिजाइन कर सकते हैं।

Contact Us

Contact Us Page एक ब्लॉग के लिए बहुत ज़रुरी होता है। इस पेज की मदद से आपके ब्लॉग रीडर्स आपके साथ संपर्क कर सकते हैं। अपनी क्वेरीज या कोई प्रश्न आपसे पूछ सकते हैं। Contact Us Page बनाने के लिए इन स्टेप्स को फ़ॉलो करें –

  • हमारे टेलीग्राम चैनल से Contact Us Page नाम के पीडीएफ को ओपन करना है।
  • पूरे कोड को कॉपी करना है।
  • ब्लॉगर डैशबोर्ड में Page के सेक्शन में आकर New Page पर सिलेक्ट करना है।
  • Title में Contact Us लिखना है।
  • कॉपी किए गए कोड को Content में पेस्ट करके 
  • Contact Us के पेज को पब्लिश करना है।

DMCA 

डिजिटल मिलेनियम कॉपीराइट एक्ट, यह यूनाइटेड स्टेट्स एक का कानून है। जो ब्लॉग या वेबसाइट की सुरक्षा के लिए बनाया गया है। DMCA के पेज को अपने ब्लॉग में लगाने से आप अपने कंटेंट को चोरी होने से बचा सकते हैं। DMCA Page बनाने के लिए इन स्टेप्स को फ़ॉलो करें –

  • हमारे टेलीग्राम चैनल से DMCA नाम के पीडीएफ को ओपन करना है।
  • पूरे Text को कॉपी करना है।
  • ब्लॉगर डैशबोर्ड में Page के सेक्शन में आकर New Page पर सिलेक्ट करना है।
  • Title में DMCA लिखना है।
  • कॉपी किए गए Text को Content में पेस्ट करके 
  • DMCA के पेज को पब्लिश करना है।

ब्लॉग पोस्ट के लिए Trending Topics ढूंढे

अपने ब्लॉग के लिए Trending टॉपिक्स ढूंडने के लिए आप इनका इस्तेमाल कर सकते हैं –

  • Google Trends
  • News Websites
  • Google Search Results
  • People Also Ask

अपना पहला ब्लॉग पोस्ट कैसे लिखें 

अपने ब्लॉग पोस्ट को यूजर्स के लिए सरल बनाना जरूरी होता है। जिससे यूजर्स को पोस्ट पढ़ने में कन्फ्यूजन न हो और यूजर्स आसानी से पोस्ट पढ़ सकें। इसीलिए ब्लॉग पोस्ट को हमेशा एक Defined Structure में ही लिखना चाहिए। इससे यूजर्स का रीडिंग एक्सपीरियंस बढ़ने की संभावना बढ़ सकती है और आपका ब्लॉग गूगल सर्च इंजन में रैंक भी कर सकता है। 

ब्लॉग पोस्ट का स्ट्रक्चर कुछ ऐसा होना चाहिए। इसको हैडिंग बिन्दुओं में बताया गया है, जिससे आप आसानी से समझ पाएंगे कि ब्लॉग पोस्ट की फॉर्मेटिंग कैसे कर सकते हैं –

Title 

अपनी पोस्ट के लिए एक अट्रेक्टिव और कैची टाइटल लिखें, जिससे यूजर्स का ब्लॉग पोस्ट पर ध्यान केंद्रित हो सके। टाइटल की लंबाई 50 से 65 वर्ड्स तक की होनी चाहिए।

Introduction

ब्लॉग पोस्ट के इंट्रोडक्शन में हमेशा आपको अपने पोस्ट की Summary देनी होती है। जो अनुभव आप दूसरों के साथ शेयर करना चाहते हैं उन मुख्य बिन्दुओं को शेयर करें और बताएं कि यूजर को इसे पढने से क्या फायदा होने वाला है। इसीलिए एक ब्लॉग पोस्ट में उसका Introduction ही मुख्य हिस्सा होता है, जिसके कारण रीडर्स का ब्लॉग पोस्ट आगे पढ़ने के लिए इंट्रेस्ट बनता है। इसमे ब्लॉग पोस्ट के Total Words का 10% हिस्सा ही लिखना होता है। जैसे – 1500 Words के पोस्ट में 150 Word इंट्रोडक्शन होना चाहिए 

Featured Images लगाएं

जैसे Youtube का थंबनेल होता है वैसे ही यह फीचर फोटो होती है

ब्लॉग पोस्ट को और ज्यादा आकर्षित बनाने के लिए पोस्ट में इमेज, Gif, वीडियो का इस्तेमाल कर सकते हैं। जिससे रिडर्स आपके ब्लॉग पोस्ट को आसानी से समझ आए। सभी फोटो को Webp फॉर्मेट में लगाना चाहिए इससे पेज slow नहीं होगा और पेज का साइज़ भी कम रहेगा। सबसे अच्छी बात कि पेज जल्दी खुलेगा। 

ब्लॉग पोस्ट में इमेज कैसे लगाएं 

  • Blogger.com hindi के डैशबोर्ड में आना है।
  • New Post पर सिलेक्ट करना है।
  • Insert Image पर सिलेक्ट करना है।
  • Choose Files पर सिलेक्ट करना है।
  • Select an image from your computer or Google Photos
  • Add selected पर क्लिक करें
  • Image properties में, Size, Alignment, Caption, Alt text, etc. सेट करें
  • Update करें

Outlines ( Heading लगाना शुरू करें )

ब्लॉग पोस्ट में Outlines लगाने का अपना एक महत्व है, जिसकी वजह से यूजर्स को पोस्ट पढ़ने में इंटरेस्टेड लगता है। Outlines को सही क्रम में लगाना ज़रूरी होता है।

  • H1 का केवल एक बार इस्तेमाल किया जाता है, जो खुद से Title में लगा होता है।
  • H2 एक हेडिंग होती है, जिसको क्वेश्चन बनाने के लिए या दूसरी लाइन बनाने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं।
  • H3 से H6 तक Sub Headings होती हैं, जिनका इस्तेमाल प्रश्न के पार्ट बनाने के लिए किया जा सकता है।

Paragraph 

हर एक हैडिंग लिखने के बाद, उनके बारे में विस्तार से Paragraph के अंदर लिखना चाहिए। ब्लॉग पोस्ट को सही तरीके से फॉर्मेट करने के लिए जहां जरूरत हो उसको नंबर्स और बुलेट्स पॉइंट्स में जरुर लगाइए। फॉन्ट, कलर का इस्तेमाल कर सकते हैं। पोस्ट में ज़रुरी शब्दों को बोल्ड और अंडरलाइन कर सकते हैं, इससे ब्लॉग पोस्ट की अच्छे से फॉर्मेटिंग के साथ ब्लॉग पोस्ट और भी सुंदर लगता है।

Conclusion ( निष्कर्ष )

ब्लॉग पोस्ट में Conclusion लिखना एक महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। इसको 50- 100 Words का लिखना चाहिए, जिसमें आप अपने रीडर्स से ब्लॉग पोस्ट से संबंधित फीडबैक मांग सकते हैं। निष्कर्ष में अपने अगले ब्लॉग पोस्ट के बारे में बता सकते हैं और कीवर्ड का इस्तेमाल भी कर सकते हैं। 

FAQs

ब्लॉग पोस्ट के बारे में गूगल सर्च से रिलेटेड प्रश्नों को ढूंड कर उन्हें यहाँ लिखकर सभी का उत्तर दें। जो People Also Ask के सेक्शन में देखने को मिलते हैं। 

ब्लॉग पोस्ट गूगल सर्च रिजल्ट में कैसे और कब दिखेंगा 

अपना पहला ब्लॉग बनाकर पहली पोस्ट लिखना ही काफी नहीं हैं। क्योंकि सिर्फ इतना करने से ही हमारा ब्लॉग और ब्लॉग पोस्ट गूगल सर्च रिजल्ट में नहीं दिखते हैं। इनको हमें एक बार Manually Add करना होता है। अपने ब्लॉग वेबसाइट और सभी पोस्ट को गूगल सर्च रिजल्ट में दिखाने के लिए हमे ब्लॉग वेबसाइट, ब्लॉग पोस्ट, और साइटमैप को गूगल सर्च कंसोल में सबमिट करना जरूरी होता है। 

Sitemap सबमिट करने के कुछ देर बाद या 24 Hour के अंदर ही ब्लॉग और ब्लॉग पोस्ट गूगल सर्च में दिखना शुरू हो जाता है। आपको अपनी पोस्ट को Manually इंडेक्स भी करना पड़ सकता है। अगर आप ब्लॉग वेबसाइट और ब्लॉग पोस्ट को इंडेक्स करना सीखना चाहते हैं तो इसे पढ़ें –

गूगल सर्च Result रैंकिंग #1 क्या है –

इंडेक्स होने के बाद आपकी पोस्ट गूगल सर्च रिजल्ट में किस Keyword पर कौन सी Position पर रैंक कर रही है, इसको हम Google रैंकिंग कहते हैं। जब हमारी पोस्ट किसी Keyword पर 1st यानी टॉप पर रैंक करती है तो इसे #1 रैंकिंग कहते हैं।  

लेकिन ब्लॉग पोस्ट को गूगल में रैंक करवाने के लिए ब्लॉग पोस्ट का SEO यानी सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन करना बहुत जरूरी होता है। तभी आप गूगल के 1st पेज पर अपनी पोस्ट को दिखा सकते हैं। हालाँकि हम निश्चित तौर पर नहीं कह सकते कि आपका पेज गूगल सर्च में 1st Position पर रैंक जरुर करेगा। लेकिन गूगल के अनुसार ब्लॉग को रैंक करने के लिए Seo एक बेस्ट प्रैक्टिस होती है। इसीलिए ब्लॉग पोस्ट का Seo Friendly होना जरूरी होता है। 

Seo क्या है 

ब्लॉग का Seo करने से ब्लॉग पर ट्रैफिक आने की संभावना बढ़ सकती है। Seo एक सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन होता है, जिसकी मदद से आप अपने ब्लॉग को सर्च इंजन में रैंक कर सकते हैं। जिससे ब्लॉग पर ऑर्गेनिक ट्रैफिक आ सकता है।

ब्लॉग पोस्ट का Seo करना सीखें 

ब्लॉग पोस्ट इस प्रकार से लिखाना होता है जिससे पोस्ट Search Engine के सभी अलग Parameters को पूरा कर सकते हैं। ऐसा करने से ब्लॉग पोस्ट सर्च इंजन में 1st पेज पर आ सकता है।

पहला ब्लॉग पोस्ट की कुछ जरूरी Settings करें 

ब्लॉग पोस्ट का Seo करना सीखें 

Labels क्या है 

Labels लगाने का मतलब होता है, किसी पोस्ट को उसकी कैटेगरी के साथ जोड़ना। इसकी मदद से रीडर्स ब्लॉग पोस्ट को आसानी से ढूंढ सकता है। 

Permalink क्या है 

इस ऑप्शन में अपने ब्लॉग पोस्ट का परमालिंक सेट करना होता है, जिसे पोस्ट का URL कहते हैं। गूगल में रैंक करने के लिए परमालिंक को Seo Friendly बनाना चाहिए।

कस्टम परमालिंक बना सकते हैं, उसके लिए Custom Permalink पर सिलेक्ट करके अपना टाइटल लिखें और उसमें ” – ” का इस्तेमाल करें। उदाहरण के लिए – seo-friendly-permalink 

Location क्या है 

इस ऑप्शन की मदद से आपके रीडर्स को यह जानकारी मिलती है की आपकी पोस्ट कहां लिखी गई है। इसलिए ब्लॉग पोस्ट में लोकेशन को सेट करना चाहिए।

Options सेटिंग क्या है 

इसमें आप अपनें पोस्ट की एडवांस सैटिंग्स कर सकते हैं, जिसमें आपको कॉमेंट को मॉडरेट, रीडर्स और बैकलिंक जेसी कुछ सैटिंग्स को कर सकते हैं।

Schedule क्या है

इसकी मदद से पोस्ट का पब्लिश करने का समय तय कर सकते हैं, जिससे यूजर्स को पोस्ट पब्लिश की जानकारी मिल सके। 

Description बनाने के लिए 

इसमें अपनें ब्लॉग पोस्ट का 150 वर्ड्स का एक शॉर्ट डिस्क्रिप्शन लिखना होता है।

निष्कर्ष –

आज के इस लेख में हमनें सीखा है कि, Blogger.com पर अपना पहला कैसे ब्लॉग बनाना है,ब्लॉग के लिए एक सही Theme को कैसे चुनें, ब्लॉग को कस्टमाइज कैसे करें, ब्लॉग के लिए Topic कैसे तैयार करें। इसके अलावा ब्लॉग की Settings और Advance Setting करने के बारे में विस्तार से बताया है।

अगर आपको हमारी यह पोस्ट थोड़ी भी पसंद आई हो तो प्यारी सी कमेंट्स जरुर करें और हमे फॉलो जरुर करें। अंत तक पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद राधे राधे।

November 6, 2023 0 comments
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